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मंगल महादशा में सूर्य अंतर्दशा: अवधि, फल और उपाय

मंगल महादशा में सूर्य की अंतर्दशा 4 माह 6 दिन चलती है। दो मित्र अग्नि-ग्रहों का यह काल करियर, पिता, भाई-बहन और स्वास्थ्य पर क्या संकेत देता है, जानें।

एक नज़र में

Antardasha duration4 महीने 6 दिन
Mahadasha total years7

विंशोत्तरी दशा में मंगल की महादशा सात वर्ष की होती है और उसकी नौ अंतर्दशाओं में सूर्य की अंतर्दशा आठवें स्थान पर आती है, यानी शुक्र की अंतर्दशा के बाद और चंद्र की अंतिम अंतर्दशा से ठीक पहले। अवधि का नियम है: महादशा के वर्ष गुणा अंतर्दशा ग्रह के वर्ष, भाग एक सौ बीस। यहाँ 7 × 6 ÷ 120 = 0.35 वर्ष, जो पारंपरिक तीन सौ साठ दिन के वर्ष से 4 माह 6 दिन बनता है (0.35 × 12 = 4.2 माह, और 0.2 माह = 6 दिन)। सौर वर्ष से गिनने पर यह लगभग 128 दिन बनता है। जो सॉफ़्टवेयर इन दिनों को तीस-तीस दिन के महीनों में बाँटते हैं, वे इसे 4 माह 8 दिन दिखाते हैं, और वास्तविक कैलेंडर में आरंभ के महीने के अनुसार यह 4 माह 5 से 8 दिन के बीच पड़ता है। विंशोत्तरी में सूर्य के वर्ष सबसे कम हैं, इसलिए मंगल महादशा की सबसे छोटी अंतर्दशा यही है।

मंगल और सूर्य: मित्र ग्रहों का संबंध और शास्त्रीय फल

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की नैसर्गिक मैत्री के अनुसार सूर्य और मंगल परस्पर मित्र हैं। दोनों क्रूर, पित्त-प्रधान और अग्नि-तत्व से जुड़े ग्रह हैं। सूर्य मंगल की मेष राशि में उच्च का होता है, और दोनों ग्रह दशम भाव में दिग्बल पाते हैं। इसलिए यह जोड़ी मूल रूप से टकराव की नहीं, एक ही दिशा में ताप बढ़ाने की है। सूर्य आत्मा, पिता, राजा, सरकार, प्रतिष्ठा, हृदय, हड्डियों और नेत्र का कारक है; मंगल साहस, छोटे भाई-बहन, भूमि, रक्त, शस्त्र, अग्नि, चोट और शल्यक्रिया का कारक है। पराशर के अंतर्दशा-फल वर्णन में संकेत है कि सूर्य उच्च, स्वराशि या केंद्र-त्रिकोण में बली हो तो इस अवधि में वाहन, यश, धन-वृद्धि और शासन-पक्ष से लाभ मिलता है; वही सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में निर्बल हो तो शारीरिक कष्ट, मानसिक चिंता और प्रयासों में बाधा बताई गई है।

अपनी कुंडली में कैसे जाँचें

पारंपरिक उपाय

सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से अर्घ्य और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ सूर्य के लिए, तथा मंगलवार को हनुमान जी या कार्तिकेय की उपासना मंगल के लिए पारंपरिक है। बीज मंत्र हैं: "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" और "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः"। रविवार को गेहूँ व गुड़ और मंगलवार को मसूर दाल का दान किया जाता है। माणिक्य या मूँगा किसी योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखाए बिना न पहनें, क्योंकि दो उष्ण ग्रहों को एक साथ बल देना हर कुंडली में उचित नहीं होता।

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महादशा को कैसे समझें

महादशा जीवन की मुख्य समय-धारा दिखाती है, लेकिन परिणाम केवल महादशा स्वामी के नाम से तय नहीं होते। जन्मकुंडली में ग्रह की राशि, भाव, दृष्टि, युति, बल, नक्षत्र और भाव स्वामित्व देखें। फिर अंतरदशा स्वामी के साथ उसका संबंध जोड़ें।

अंतरदशा वही विषय तेज करती है जो महादशा ने खोला है। शुभ फल तब साफ दिखते हैं जब दोनों ग्रह कुंडली में सहायक हों और गोचर भी उसी क्षेत्र को बल दे। कठिन फल तब बढ़ते हैं जब दशा स्वामी कमजोर, पीड़ित या अशुभ भावों से जुड़ा हो।

तारीख, विवाह, नौकरी, संतान, धन या स्वास्थ्य जैसे निर्णयों के लिए व्यक्तिगत जन्म विवरण जरूरी है। यह पेज प्रणाली, अर्थ और सावधानियाँ समझाता है; सटीक आरंभ-अंत तिथि, दशा संतुलन और उपाय जन्म समय से ही निकाले जाते हैं।

प्रकाशक: इशवरम। इस पेज पर दी गई सभी तिथियाँ, समय और गणनाएँ इशवरम के गणना इंजन से आती हैं — किसी AI से नहीं। उनका अर्थ समझाने वाली भाषा मशीन की मदद से लिखी गई है, ताकि हर कुंडली की व्याख्या आपकी अपनी भाषा में उसी समय मिल सके; इसे नियमों से जाँचा जाता है, हर पृष्ठ को कोई व्यक्ति अलग से नहीं पढ़ता। हमारी पूरी पद्धति देखें

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