Aaj Ka Choghadiya
Aaj Ka Choghadiya
रविवार, 20 सितंबर 2026
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| Choghadiya | Quality | Recommended Activities |
|---|---|---|
| Amrit (अमृत) | Nectar / Highest Good | All auspicious tasks, holy puja, travel, medical treatments |
| Shubh (शुभ) | Auspicious / Sacred | Ceremonies, marriage talks, purchasing property, study |
| Labh (लाभ) | Profit / Gain | New business ventures, opening accounts, trade, investments |
| Char (चल) | Movement / Dynamic | Journeys, vehicle driving, commuting, short-term tasks |
| Rog (रोग) | Affliction / Disease | Inauspicious — avoid starting major projects or medicines |
| Kaal (काल) | Loss / Inauspicious | Inauspicious — strictly avoid financial risks or new journeys |
| Udveg (उद्वेग) | Anxiety / Stress | Inauspicious — avoid official disputes or government work |
Day Choghadiya
दिन का चौघड़ियाNight Choghadiya
रात का चौघड़ियाInauspicious Periodsवार वेला · काल वेला · काल रात्रि
Avoid starting new work during these periods. Tradition considers them unfavourable for auspicious activities.
Vaar Vela
वार वेला
10:44 – 12:14
Kaal Vela
काल वेला
12:14 – 13:45
Kaal Ratri
काल रात्रि
03:14 – 04:43
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चौघड़िया एक पारंपरिक वैदिक मुहूर्त पद्धति है जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन और रात, दोनों को 8-8 भागों में बाँटती है। इनमें सात नाम क्रम से घूमते हैं: अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर यात्रा के लिए उपयुक्त तटस्थ है, जबकि रोग, काल और उद्वेग में नए कार्य का आरंभ टाला जाता है।
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चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया (चतुर्थांश) एक प्राचीन वैदिक मुहूर्त पद्धति है जिसमें दिन और रात को 8-8 समान भागों में बांटा जाता है। प्रत्येक भाग (चौघड़िया) लगभग डेढ़ घंटे का होता है। इसमें शुभ, लाभ, अमृत, चर (शुभ) और रोग, काल, उद्वेग (अशुभ) — ये 7 प्रकार होते हैं। चर यात्रा के लिए उत्तम माना जाता है।
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य — व्यापार आरंभ, यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश, या धार्मिक अनुष्ठान — के लिए शुभ चौघड़िया का चयन करना हिंदू परंपरा में अत्यंत आवश्यक माना जाता है। हमारा चौघड़िया कैलकुलेटर सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर आपके स्थान के लिए सटीक समय प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज का शुभ चौघड़िया कौन सा है?
शुभ, लाभ, अमृत और चर — ये चार चौघड़िया शुभ माने जाते हैं और इन्हीं में महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने चाहिए। प्रत्येक दिन का शुभ चौघड़िया सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है, इसलिए यह हर शहर में थोड़ा भिन्न होता है। ऊपर दिया कैलकुलेटर आपके स्थान के अनुसार आज का सटीक शुभ समय दिखाता है।
यात्रा के लिए कौन सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?
यात्रा के लिए चर चौघड़िया सर्वोत्तम माना जाता है — 'चर' का अर्थ ही गतिशीलता है। इसके अतिरिक्त शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया में भी यात्रा शुभ रहती है। रोग, काल और उद्वेग चौघड़िया में नई यात्रा आरंभ करने से बचना चाहिए।
रोग, काल और उद्वेग चौघड़िया में क्या करना चाहिए?
ये तीन चौघड़िया अशुभ माने जाते हैं और इनमें विवाह, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ जैसे शुभ कार्य टालने चाहिए। यदि कार्य अत्यावश्यक हो तो अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करें, जो प्रायः इन अशुभ अवधियों के दोष को कम करता है।
आठ-खंड प्रणाली की उत्पत्ति
चौघड़िया मुहूर्त-शास्त्र की एक लोकप्रिय पद्धति है जो सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटती है — दिन के लिए आठ और रात के लिए आठ, यानी कुल सोलह खंड प्रतिदिन। हर खंड की लंबाई दिन की कुल अवधि पर निर्भर करती है, इसलिए यह मौसम और स्थान के अनुसार बदलती रहती है। यह पद्धति विशेषकर उत्तर और पश्चिम भारत में लोकप्रिय है, जहाँ आम जनमानस बिना जटिल पंचांग-गणना के भी दिन का शुभ-अशुभ समय झट से पहचान सके — इसीलिए इसे “सुलभ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी सामान्य जन के लिए सरल किया गया मुहूर्त-ज्ञान।
सात चौघड़िया और उनके ग्रह-स्वामी
प्रत्येक चौघड़िया का एक ग्रह-स्वामी होता है, जिससे उसकी प्रकृति तय होती है। उद्वेग बुध द्वारा शासित है और चिंता-उतावलेपन का संकेत देता है। चर शुक्र द्वारा शासित है और गति-यात्रा के लिए उत्तम माना जाता है। लाभ बुध का ही एक अन्य रूप है, जो प्राप्ति और वृद्धि से जुड़ा है। अमृत चंद्रमा द्वारा शासित सबसे शुभ खंड है। काल शनि द्वारा शासित अशुभ खंड है। शुभ बृहस्पति द्वारा शासित है और शुभ कार्यों के लिए उत्तम है। रोग मंगल द्वारा शासित है और स्वास्थ्य-संबंधी सतर्कता का प्रतीक है। यह ग्रह-आधारित संरचना ही चौघड़िया को ज्योतिष के व्यापक ढाँचे से जोड़ती है।
दिन और रात का क्रम-पैटर्न अलग क्यों है
परंपरा के अनुसार सातों चौघड़िया का क्रम प्रत्येक वार (दिन) के लिए निश्चित होता है, और दिन का क्रम रात के क्रम से भिन्न होता है क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित ग्रह-गणना दिन-रात में अलग ढंग से आगे बढ़ती है। यही कारण है कि किसी दिन का पहला चौघड़िया शुभ हो सकता है जबकि उसी रात का पहला चौघड़िया अशुभ। यह क्रम-प्रणाली सदियों पुरानी सारणी-आधारित परंपरा से चली आ रही है, जिसे बाद के ज्योतिषियों ने सूर्य की स्थिति के साथ जोड़कर संहिताबद्ध किया। आधुनिक कैलकुलेटर यही परंपरागत क्रम वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त गणना के साथ जोड़कर प्रस्तुत करते हैं।
चौघड़िया, राहु काल और मुहूर्त में भेद
चौघड़िया, राहु काल और शास्त्रीय मुहूर्त — तीनों समय-चयन की अलग-अलग परतें हैं। राहु काल दिन का एक ही निश्चित अशुभ खंड बताता है, जबकि चौघड़िया पूरे दिन-रात को शुभ-अशुभ खंडों में बाँटकर व्यापक चित्र देता है। शास्त्रीय मुहूर्त सबसे सूक्ष्म पद्धति है — यह तिथि, नक्षत्र, योग, करण और व्यक्तिगत कुंडली तक को ध्यान में रखता है। परंपरा के अनुसार छोटे-मोटे दैनिक कार्यों — दुकान खोलना, यात्रा आरंभ करना, सामान्य खरीदारी — के लिए चौघड़िया पर्याप्त माना जाता है, जबकि विवाह या गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए पूर्ण मुहूर्त शास्त्र का सहारा लेना उचित समझा जाता है।
चर चौघड़िया — यात्रा का विशेष महत्व
चर चौघड़िया को परंपरा में विशेष स्थान मिला है क्योंकि इसका शासक शुक्र गति, आकर्षण और सुख का कारक माना जाता है। “चर” शब्द का अर्थ ही “गतिशील” है, इसलिए यह हर प्रकार की यात्रा — छोटी दूरी हो या लंबी — के लिए शुभ माना जाता है, चाहे दिन कोई भी हो। कुछ परंपराओं में चर चौघड़िया को इतना सर्वग्राही माना गया है कि इसे लाभ और अमृत के साथ मिलाकर “सार्वत्रिक शुभ त्रय” कहा जाता है। यात्रा से पहले परंपरागत रूप से चर, लाभ या अमृत में से किसी एक चौघड़िया को चुनना और इष्ट देव का स्मरण करना शुभ माना गया है।
रात्रि चौघड़िया — किसके लिए उपयोगी है
आधुनिक जीवनशैली में बहुत सारी गतिविधियाँ सूर्यास्त के बाद होती हैं — ऑनलाइन ऑर्डर देना, टिकट बुक करना, दूर देश के परिजन से महत्वपूर्ण बातचीत, रात की ट्रेन या उड़ान पकड़ना। इन्हीं परिस्थितियों के लिए रात्रि चौघड़िया की सारणी उपयोगी होती है, जो सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के आठ खंड बताती है। ग्रंथों में रात्रि के खंडों का विधान दिन जितना ही पुराना है — व्यापारी कारवां और तीर्थयात्री रात में प्रस्थान का निर्णय इसी से लेते थे। एक व्यावहारिक बारीकी ध्यान रखने योग्य है: मध्यरात्रि के बाद का हिस्सा अगली अंग्रेज़ी तारीख में गिना जाता है, पर चौघड़िया की दृष्टि से वह पिछले ही वार की रात्रि-सारणी का भाग रहता है, क्योंकि वैदिक दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है।
चौघड़िया परंपरा पर और प्रश्न
चौघड़िया में कुल कितने खंड होते हैं?
प्रतिदिन कुल सोलह खंड होते हैं — दिन के आठ और रात के आठ। हर खंड की अवधि सूर्योदय-सूर्यास्त के अंतर पर निर्भर करती है, इसलिए यह हर दिन और हर स्थान पर थोड़ी अलग होती है।
अमृत चौघड़िया सबसे शुभ क्यों माना जाता है?
अमृत चौघड़िया चंद्रमा द्वारा शासित है, जो मन, शांति और पोषण का कारक माना जाता है। परंपरा में इसे लगभग हर प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त माना गया है, इसीलिए इसका नाम ही “अमृत” — अमरता और कल्याण का प्रतीक — रखा गया।
काल चौघड़िया में कोई कार्य क्यों नहीं करना चाहिए?
काल चौघड़िया शनि द्वारा शासित है, जो विलंब, बाधा और अनुशासन से जुड़ा ग्रह माना जाता है। परंपरा के अनुसार इसमें नए कार्य आरंभ करने से परिणाम में देरी या रुकावट आने की प्रवृत्ति बताई गई है, इसलिए इसे नई शुरुआत के लिए टाला जाता है।
चौघड़िया और राहु काल में क्या अंतर है?
राहु काल दिन का केवल एक निश्चित अशुभ खंड बताता है, जबकि चौघड़िया पूरे दिन-रात को सात प्रकार के शुभ-अशुभ खंडों में बाँटकर अधिक विस्तृत जानकारी देता है। दोनों पद्धतियाँ स्वतंत्र हैं, इसलिए एक साथ मिलाकर देखना अधिक संपूर्ण मार्गदर्शन देता है।
क्या चौघड़िया हर शहर में एक जैसा होता है?
नहीं। चौघड़िया की गणना उस स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित होती है, इसलिए अलग-अलग देशांतर-अक्षांश वाले शहरों में एक ही चौघड़िया का समय अलग-अलग होता है, हालांकि क्रम-पैटर्न वही रहता है।
क्या चौघड़िया बड़े संस्कारों — जैसे विवाह — के लिए पर्याप्त है?
परंपरा चौघड़िया को दैनिक और सामान्य कार्यों के लिए उपयुक्त मानती है। विवाह, गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और वर-वधू की कुंडली को मिलाकर पूर्ण मुहूर्त शास्त्र का सहारा लेना अधिक उचित समझा जाता है।
शहर के अनुसार चौघड़िया
चौघड़िया दिन और रात को स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से विभाजित करता है, इसलिए हर शहर की अपनी अवधि होती है। आज का चौघड़िया देखने के लिए अपना शहर चुनें:
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