हिंदू पंचांग
आज की तिथि
आज (बुधवार, 4 नवंबर 2026) की तिथि, नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार: कृष्ण पक्ष दशमी — 3 नवंबर, 11:55 से 4 नवंबर, 11:04 (IST) तक, फिर एकादशी। अपने नगर की तिथि नीचे देखें।
कृष्ण पक्ष
दशमी
Dashami
पूर्ण — परंपरा में पूर्णता और फल-प्राप्ति से जुड़ी
दशमी 11:04 तक (IST), फिर एकादशी।
दशमी का महत्व
शुभ कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसके अधिदेवता धर्मराज हैं।
नए कार्य के लिए शुभ: हाँ — यह तिथि नई गतिविधि शुरू करने के लिए अनुकूल मानी जाती है
आज के पंचांग का सार · नई दिल्ली
तिथि
दशमी (कृष्ण पक्ष)
नक्षत्र
पूर्व फाल्गुनी
योग
Brahma
करण
Vishti
वार
बुधवार
सूर्योदय
06:35
तिथि के 5 प्रकार
नंदा तिथि
आनंददायक — परंपरा में उत्सव, मेल-जोल और शुरुआत से जुड़ी
भद्रा तिथि
स्थिर — परंपरा में संस्कार और महत्वपूर्ण निर्णयों से जुड़ी
जया तिथि
विजयी — परंपरा में साहस और बाधा सुलझाने से जुड़ी
रिक्ता तिथि
रिक्त — परंपरा में बड़ी शुरुआत के बजाय विशेष पूजा से जुड़ी
पूर्णा तिथि
पूर्ण — परंपरा में पूर्णता और फल-प्राप्ति से जुड़ी
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आज के त्योहार और व्रत — बुधवार, 4 नवंबर 2026
इस तिथि पर कोई प्रमुख त्योहार या व्रत नहीं है। पूरा हिंदू त्योहार और व्रत कैलेंडर देखें →
तिथि हिंदू पंचांग का चंद्र दिवस है, वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से ठीक 12 अंश आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। परंपरा इन्हें पाँच गुणों में बाँटती है: नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा।
आज की तिथि और व्रत की तिथि में अंतर
तिथि आधी रात पर ही नहीं बदलती। वर्तमान तिथि और सूर्योदय पर लागू तिथि अलग हो सकती हैं। पूजा या व्रत के लिए परिणाम में चुनी तिथि, स्थान और समय क्षेत्र देखें; संबंधित पर्व के नियम भी जाँचें।
अपने स्थान का सूर्योदय और पूरा पंचांग देखेंइंजन की गणनाएँ हर तिमाही स्वतंत्र पारंपरिक पंचांग स्रोतों से जाँची जाती हैं — पिछली जाँच को पास हुई। पूरी पद्धति देखें
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तिथि क्या है?
तिथि हिंदू चंद्र पंचांग का सबसे मौलिक अंग है। तिथि वह समय है जो चंद्रमा को सूर्य पर ठीक 12° की बढ़त पाने में लगता है — औसतन लगभग 23.6 घंटे, यद्यपि चंद्रमा की दीर्घवृत्तीय कक्षा के कारण यह बदलता रहता है। एक पूर्ण चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्र) में 15 और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्र) में 15।
अंग्रेज़ी कैलेंडर के विपरीत, जहाँ दिन 24 घंटे का निश्चित काल है, तिथि एक गतिशील खगोलीय इकाई है। यह किसी भी समय आरंभ या समाप्त हो सकती है। इसीलिए पंचांग उदय तिथि नियम का पालन करता है — स्थानीय सूर्योदय के समय सक्रिय तिथि को उस दिन की तिथि माना जाता है।
तिथि पंचांग के पाँच अंगों में से एक है, साथ में वार (दिन), नक्षत्र, योग और करण। इन पाँचों से किसी भी क्षण की शुभता निर्धारित होती है। पूजा, व्रत और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए शुभ मुहूर्त चुनने में तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
हमारा तिथि विवरण Swiss Ephemeris की वास्तविक ग्रह गणना पर आधारित है, जो चयनित नगर के लिए गणना करता है। इसमें आज की तिथि, पक्ष, तिथि का प्रकार और दिन का पंचांग संदर्भ सम्मिलित है — यह आपकी दैनिक पूजा, व्रत और योजना के लिए मार्गदर्शक है।
पंचांग के पाँच अंग — तिथि किस प्रणाली का हिस्सा है
पंचांग का अर्थ ही है ‘पाँच अंग’ — किसी भी क्षण की शुभता इन्हीं पाँच खगोलीय मापों से तय होती है, और तिथि इनमें पहला व सबसे मौलिक अंग है। हर अंग एक अलग खगोलीय संबंध नापता है और उसकी गणना का अपना नियम है:
| अंग | क्या नापता है |
|---|---|
| तिथि (चंद्र दिवस) | चंद्रमा का सूर्य से कोणीय अंतर — हर 12° की बढ़त एक तिथि पूरी करती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ। यही व्रत, पूजा और संस्कारों का आधार है। |
| वार (दिन) | सूर्योदय से सूर्योदय तक का सौर दिवस — रवि से शनि तक सात वार। प्रत्येक वार का एक ग्रह-स्वामी है और उसी से दिन का स्वभाव जुड़ता है। |
| नक्षत्र | चंद्रमा किस तारा-मंडल में स्थित है। पूरे राशिचक्र को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है और मुहूर्त में तिथि के बाद नक्षत्र देखा जाता है। |
| योग | सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों का योग — कुल 27 योग, जो दिन की समग्र शुभता का एक और स्तर बताते हैं। |
| करण | तिथि का आधा भाग — एक तिथि में दो करण होते हैं, कुल 11 करण। बही-खाता, यात्रा जैसे कार्यों में करण देखा जाता है। |
सभी 15 तिथियाँ — प्रकार, महत्व और प्रमुख व्रत
हर तिथि का एक स्वभाव-प्रकार होता है, और यही बताता है कि कौन-सा कार्य किस तिथि पर शुभ है। नीचे शुक्ल पक्ष की पंद्रह तिथियाँ दी हैं; कृष्ण पक्ष में यही क्रम प्रतिपदा से चतुर्दशी तक चलता है और अंत में पूर्णिमा के स्थान पर अमावस्या आती है। प्रकार-चक्र दोनों पक्षों में एक-सा रहता है — नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा — और हर पाँचवीं तिथि पर दोहराता है। रिक्ता तिथियों (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) पर नए शुभ आरंभ टाले जाते हैं, पर वही तिथियाँ देव-पूजा और साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती हैं।
| तिथि | प्रकार | किस काम के लिए | प्रमुख व्रत/पर्व |
|---|---|---|---|
| प्रतिपदा | नंदा | उत्सव, नए कार्य व यात्रा | गुड़ी पड़वा, नव संवत्सर |
| द्वितीया | भद्रा | विवाह व सभी शुभ संस्कार | भाई दूज |
| तृतीया | जया | बल व साहस वाले कार्य | अक्षय तृतीया, हरतालिका तीज |
| चतुर्थी | रिक्ता | नए आरंभ टालें; पूजा श्रेष्ठ | गणेश/संकष्टी/विनायक चतुर्थी |
| पंचमी | पूर्णा | विद्या, चिकित्सा व कला | नाग पंचमी, वसंत पंचमी |
| षष्ठी | नंदा | पराक्रम व संघर्ष-समाधान | छठ (षष्ठी), स्कंद षष्ठी |
| सप्तमी | भद्रा | यात्रा व राजकीय कार्य | रथ सप्तमी |
| अष्टमी | जया | पूजा व साधना (शुभ संस्कार टालें) | जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी |
| नवमी | रिक्ता | नए आरंभ टालें; देवी-आराधना श्रेष्ठ | राम नवमी, महानवमी |
| दशमी | पूर्णा | पूर्णता के कार्य, अत्यंत शुभ | विजयादशमी (दशहरा) |
| एकादशी | नंदा | व्रत, दान व आध्यात्मिक कार्य | एकादशी व्रत (विष्णु) |
| द्वादशी | भद्रा | शुभ संस्कार व दान | वामन द्वादशी |
| त्रयोदशी | जया | साहस व प्रतियोगिता के कार्य | प्रदोष व्रत, धनतेरस |
| चतुर्दशी | रिक्ता | नए आरंभ टालें; साधना अत्यंत शक्तिशाली | शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी |
| पूर्णिमा | पूर्णा | पूर्णता, दान व पूजन के लिए श्रेष्ठ | सत्यनारायण पूजा, गुरु पूर्णिमा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज कौन सी तिथि है?
आज की तिथि: कृष्ण पक्ष दशमी — 3 नवंबर, 11:55 से 4 नवंबर, 11:04 (IST) तक, फिर एकादशी। यह गणना पंचांग इंजन से नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार होती है; ऊपर दिए कार्ड में अपने नगर का सजीव विवरण देखें। ध्यान रखें कि तिथि आधी रात को नहीं बदलती — जब चंद्रमा सूर्य से अगले 12° आगे बढ़ जाता है तब नई तिथि लगती है, इसलिए तिथि दिन के बीच में भी बदल सकती है। पंचांग सूर्योदय के समय सक्रिय तिथि को ही पूरे दिन की तिथि मानता है (उदय तिथि नियम)।
तिथि क्या है?
तिथि हिंदू पंचांग का चंद्र दिवस है — वह समय जो चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने में लगता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: 15 शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा तक बढ़ता चंद्र) में और 15 कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या तक घटता चंद्र) में। तिथि पंचांग का सबसे मौलिक अंग है और पूजा, व्रत तथा संस्कारों के लिए इसी का प्रयोग होता है।
आज की तिथि का क्या अर्थ है?
आज की तिथि का अर्थ है हिंदू पंचांग का वर्तमान चंद्र दिवस। यह प्रतिदिन (और कभी-कभी एक ही दिन में) बदलती है, क्योंकि तिथि चंद्रमा की सटीक स्थिति पर आधारित है। आज की तिथि जानने से शुभ मुहूर्त, व्रत और दैनिक कार्यों के लिए उपयुक्त समय निर्धारित करने में सहायता मिलती है। पंचांग सूर्योदय के समय सक्रिय तिथि को उस दिन की तिथि मानता है (उदय तिथि नियम)।
कुल कितनी तिथियाँ होती हैं?
कुल 30 तिथियाँ होती हैं। 15 शुक्ल पक्ष की तिथियाँ हैं: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा। 15 कृष्ण पक्ष की तिथियाँ भी यही नाम रखती हैं और अंत में पूर्णिमा के स्थान पर अमावस्या आती है।
नए कार्यों के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?
तिथियों के 5 प्रकार हैं जिनके अलग गुण हैं: नंदा (1, 6, 11) — आनंददायक, उत्सव और नए कार्यों के लिए शुभ। भद्रा (2, 7, 12) — स्थिर, सभी संस्कारों के लिए शुभ। जया (3, 8, 13) — विजयी, बल की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए उत्तम। रिक्ता (4, 9, 14) — नए आरंभ के लिए अशुभ पर देव-पूजा के लिए शक्तिशाली। पूर्णा (5, 10, 15/30) — पूर्ण और अत्यंत शुभ। रिक्ता तिथियों पर महत्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचें।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?
शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्र) अमावस्या से पूर्णिमा तक की 15 तिथियों का काल है — विवाह, गृह प्रवेश और नए आरंभ जैसे शुभ कार्यों के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है। कृष्ण पक्ष (घटता चंद्र) पूर्णिमा से अमावस्या तक का काल है — पूर्णता, पितृ पूजा और साधना से जुड़ा है। एकादशी सहित कई व्रत दोनों पक्षों में आते हैं।
तिथि कभी-कभी दिन में क्यों बदल जाती है?
तिथि ठीक 24 घंटे की नहीं होती — यह चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने का समय है, जो औसतन लगभग 23.6 घंटे होता है। इसीलिए एक तिथि एक दिन देर से आरंभ होकर रात भर चल सकती है और अगले दिन जल्दी समाप्त हो सकती है। पंचांग सूर्योदय के समय सक्रिय तिथि को उस दिन की तिथि मानता है, इसलिए अलग देशांतर वाले दो नगरों की एक ही अंग्रेज़ी तारीख पर भिन्न तिथि हो सकती है।
पंचांग के पाँच अंग कौन-कौन से हैं?
पंचांग का अर्थ ही है 'पाँच अंग' — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा का सूर्य से 12° का कोणीय अंतर नापती है; वार सूर्योदय से सूर्योदय तक का सौर दिवस है (रवि से शनि); नक्षत्र बताता है चंद्रमा किस तारा-मंडल में है (कुल 27); योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों का योग है (कुल 27); और करण तिथि का आधा भाग है (एक तिथि में दो करण, कुल 11)। इन पाँचों से किसी भी क्षण की शुभता तय होती है, और तिथि इनमें पहला व सबसे मौलिक अंग है।