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Shubh Muhurat

Shubh Muhurat Today

Tuesday, 4 August 2026

Rahu Kaal, Yamagandam & auspicious timings for New Delhi

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Calculating muhurat...

What is Shubh Muhurat?

Shubh Muhurat(auspicious timing) is a concept in Vedic astrology where specific time periods of the day are considered favorable or unfavorable for starting important activities. This is determined by analyzing the Panchang — the five elements of the Hindu calendar: Tithi, Nakshatra, Yoga, Karana, and Vara.

Rahu Kaal is the most widely observed inauspicious period. It occurs daily for approximately 1.5 hours and is ruled by Rahu, the shadow planet associated with obstacles and delays. Most Hindus avoid starting new ventures, signing contracts, or beginning journeys during Rahu Kaal.

Yamagandam is another inauspicious period ruled by Yama, the lord of death. Gulika Kaal (ruled by Saturn) is also avoided for auspicious beginnings. Together with Rahu Kaal, these three periods are the key inauspicious windows to avoid each day.

Our calculator uses real planetary positions from Swiss Ephemeris to compute the exact Panchang elements at each hour, giving you an accurate picture of auspicious and inauspicious timings throughout the day.

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वैदिक ज्योतिष की वह अवधारणा है जिसमें दिन के विशिष्ट समय को महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए अनुकूल या प्रतिकूल माना जाता है। यह पंचांग — हिंदू कैलेंडर के पाँच अंगों: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के विश्लेषण से निर्धारित होता है।

राहु कालसबसे व्यापक रूप से पालन किया जाने वाला अशुभ काल है। यह प्रतिदिन लगभग 1.5 घंटे का होता है और राहु द्वारा शासित है — वह छाया ग्रह जो बाधाओं और विलंब से जुड़ा है। अधिकांश हिंदू राहु काल में नया कार्य, अनुबंध या यात्रा आरंभ करने से बचते हैं।

यमगंड काल यम (मृत्यु के देवता) द्वारा शासित एक और अशुभ काल है। गुलिक काल (शनि द्वारा शासित) भी शुभ कार्यों के लिए वर्जित है। राहु काल के साथ ये तीनों प्रतिदिन की प्रमुख अशुभ अवधियाँ हैं जिनसे बचना चाहिए।

हमारा कैलकुलेटर Swiss Ephemeris की वास्तविक ग्रह स्थिति का उपयोग करके प्रत्येक घंटे का सटीक पंचांग गणना करता है, जिससे आपको दिन भर के शुभ और अशुभ समय की सटीक जानकारी मिलती है। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, व्यापार आरंभ या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले मुहूर्त अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहु काल प्रतिदिन बदलता है क्या?

हाँ, राहु काल का समय प्रत्येक वार (दिन) के अनुसार बदलता है। सोमवार, मंगलवार, बुधवार आदि प्रत्येक दिन राहु काल अलग-अलग समय पर आता है। साथ ही, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार राहु काल की अवधि मौसम और स्थान के साथ भी बदलती है। इसलिए सटीक गणना के लिए अपने स्थान और तिथि के अनुसार देखना आवश्यक है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

राहु काल में नए कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है, लेकिन चल रही नियमित पूजा, जप और ध्यान जारी रखने में कोई बाधा नहीं है। कुछ परंपराओं में राहु काल को राहु की पूजा और दुर्गा मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से उपयुक्त भी माना जाता है। मुख्य नियम यह है कि नया व्यापार, यात्रा या महत्वपूर्ण समझौता राहु काल में न करें।

मुहूर्त शास्त्र की शास्त्रीय जड़ें

मुहूर्त शास्त्र ज्योतिष की वह शाखा है जो कर्म के लिए काल का चयन सिखाती है — इसका मूल विचार यह है कि एक ही कार्य अलग-अलग समय पर आरंभ होने से भिन्न फल की प्रवृत्ति रखता है। मुहूर्त चिंतामणि और बृहत् संहिता जैसे ग्रंथों में इसका व्यवस्थित विवेचन मिलता है, जहाँ ऋषियों ने विवाह से लेकर बीज बोने तक हर कार्य के लिए उपयुक्त काल के नियम लिखे। परंपरा में एक दिन-रात को तीस मुहूर्तों में बाँटा गया है, जिनमें प्रत्येक की अपनी प्रकृति और देवता माने गए हैं। जन्म कुंडली यह बताती है कि जीवन में क्या संभावनाएँ हैं, जबकि मुहूर्त यह बताता है कि उन संभावनाओं पर कब कदम रखना श्रेष्ठ है — इसीलिए इसे “इलेक्शनल ज्योतिष” यानी चयन का शास्त्र कहा जाता है।

हर कार्य का अपना मुहूर्त-विचार

मुहूर्त शास्त्र की सूक्ष्मता यह है कि हर कार्य के लिए अलग तत्व देखे जाते हैं। विवाह मुहूर्त में वर-वधू की राशि से चंद्रबल, तारा-बल और सप्तम भाव की स्थिति प्रमुख होती है, और कुछ विशेष नक्षत्र विवाह के लिए वर्जित माने गए हैं। गृह-प्रवेश में वास्तु शांति के साथ स्थिर लग्न का महत्व है, ताकि नए घर में स्थायित्व की प्रवृत्ति बने। व्यापार आरंभ के लिए लाभ और वृद्धि से जुड़े योग तथा बुध-बृहस्पति की अनुकूल स्थिति देखी जाती है। मुंडन, नामकरण और अन्नप्राशन जैसे संस्कारों में बालक के जन्म-नक्षत्र से गणना होती है। यही कारण है कि एक ही दिन किसी कार्य के लिए श्रेष्ठ और किसी अन्य के लिए वर्जित हो सकता है।

अभिजीत मुहूर्त — मध्याह्न का सर्वमान्य खंड

अभिजीत मुहूर्त दिन के ठीक मध्य के आसपास का वह खंड है जिसे परंपरा लगभग हर कार्य के लिए शुभ मानती है — इसका नाम ही “अभिजीत” यानी विजयी है। शास्त्रीय मत के अनुसार यह सूर्य के मध्याह्न-बिंदु के इर्द-गिर्द बनता है, इसलिए इसका सटीक समय हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है। परंपरा में इसे आपात-मुहूर्त की तरह देखा जाता है — जब कोई उपयुक्त मुहूर्त उपलब्ध न हो और कार्य टाला न जा सके, तो अभिजीत का आश्रय लिया जाता है। ध्यान देने योग्य अपवाद भी है: कुछ परंपराएँ बुधवार को अभिजीत का प्रयोग वर्जित मानती हैं, और विवाह जैसे बड़े संस्कारों के लिए इसे पूर्ण मुहूर्त-गणना का विकल्प नहीं माना जाता।

व्यक्तिगत कुंडली क्यों मायने रखती है

पंचांग से निकला मुहूर्त सबके लिए समान होता है, पर परंपरा इसे अंतिम शब्द नहीं मानती — वही समय एक व्यक्ति के लिए अनुकूल और दूसरे के लिए साधारण हो सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति का चंद्रबल और तारा-बल उसकी अपनी राशि-नक्षत्र से गिना जाता है। इसीलिए विवाह या गृह-प्रवेश जैसे बड़े निर्णयों में कुल परंपरा यह रही है कि पंचांग के सामान्य मुहूर्त को व्यक्ति की जन्म कुंडली से मिलाकर अंतिम चयन किया जाए — चंद्रमा की गोचर स्थिति, चल रही दशा और अष्टम-द्वादश जैसी गोचर-स्थितियों का विचार करके। सामान्य दैनिक कार्यों के लिए पंचांग का मुहूर्त पर्याप्त है; जीवन के बड़े पड़ावों के लिए अनुभवी जोतिषी से व्यक्तिगत मिलान करवाना ही पूर्ण विधि मानी जाती है।

मुहूर्त की सीमाएँ — ईमानदार दृष्टि

मुहूर्त शास्त्र समय की गुणवत्ता का परंपरागत मानचित्र है, कोई गारंटी नहीं — यह बात शास्त्र स्वयं स्वीकारता है। परंपरा में कहा गया है कि कर्म की शुद्धता, व्यक्ति का प्रयास और परिस्थितियाँ फल के मुख्य निर्धारक हैं; मुहूर्त उन्हें सहारा देता है, प्रतिस्थापित नहीं करता। यही कारण है कि आपातकालीन कार्यों — चिकित्सा, अनिवार्य यात्रा, समय-बद्ध सरकारी कार्य — के लिए परंपरा मुहूर्त की प्रतीक्षा को आवश्यक नहीं मानती। एक संतुलित दृष्टि यह है: जहाँ चयन की स्वतंत्रता हो, वहाँ शुभ समय चुन लेना परंपरा से जुड़ाव और मानसिक बल दोनों देता है; जहाँ स्वतंत्रता न हो, वहाँ कार्य की निष्ठा ही सबसे बड़ा मुहूर्त है।

मुहूर्त शास्त्र पर और प्रश्न

मुहूर्त शास्त्र किस ग्रंथ पर आधारित है?

मुहूर्त शास्त्र का व्यवस्थित विवेचन मुहूर्त चिंतामणि और बृहत् संहिता जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता है। इन ग्रंथों में विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा और संस्कारों के लिए काल-चयन के विस्तृत नियम दिए गए हैं, जिन्हें आज भी परंपरागत जोतिषी आधार मानते हैं।

क्या हर कार्य के लिए मुहूर्त अलग होता है?

हाँ। विवाह में चंद्रबल और सप्तम भाव, गृह-प्रवेश में स्थिर लग्न, व्यापार में लाभ-योग और संस्कारों में बालक का जन्म-नक्षत्र देखा जाता है। इसीलिए एक ही दिन किसी कार्य के लिए श्रेष्ठ और किसी अन्य के लिए वर्जित हो सकता है।

अभिजीत मुहूर्त क्या है और कब उपयोगी है?

अभिजीत मुहूर्त दिन के मध्य के आसपास का खंड है जिसे परंपरा लगभग हर कार्य के लिए शुभ मानती है। जब कोई उपयुक्त मुहूर्त उपलब्ध न हो और कार्य टाला न जा सके, तब इसका आश्रय लिया जाता है। कुछ परंपराएँ बुधवार को इसका प्रयोग वर्जित मानती हैं।

क्या पंचांग का मुहूर्त सबके लिए समान फल देता है?

पंचांग का मुहूर्त सामान्य होता है, पर व्यक्ति का चंद्रबल और तारा-बल उसकी अपनी राशि-नक्षत्र से गिना जाता है। इसलिए बड़े निर्णयों में परंपरा पंचांग के मुहूर्त को व्यक्तिगत कुंडली से मिलाकर अंतिम चयन करने की सलाह देती है।

क्या मुहूर्त न मिलने पर कार्य टाल देना चाहिए?

नहीं। परंपरा स्वयं आपातकालीन और अनिवार्य कार्यों — चिकित्सा, समय-बद्ध यात्रा, आवश्यक सरकारी कार्य — के लिए मुहूर्त की प्रतीक्षा को आवश्यक नहीं मानती। मुहूर्त वहाँ उपयोगी है जहाँ समय चुनने की स्वतंत्रता हो।

क्या शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य निश्चित सफल होता है?

नहीं — शास्त्र स्वयं यह स्पष्ट करता है कि कर्म की शुद्धता, व्यक्ति का प्रयास और परिस्थितियाँ फल के मुख्य निर्धारक हैं। मुहूर्त अनुकूल प्रवृत्ति का सहारा देता है, परिणाम की गारंटी नहीं। चार्ट और काल दोनों प्रवृत्तियाँ दिखाते हैं, निश्चित परिणाम नहीं।

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