फ्री कुंडली
फ्री जन्म कुंडली हिंदी में — ऑनलाइन, जन्म तिथि से
अपनी जन्म कुंडली यहाँ हिंदी में निःशुल्क देखें। यह जन्म क्षण के आकाश का नक्शा है — जीवन के 12 भाव, और उनमें 12 राशियों में बैठे 9 ग्रह। जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि लग्न कहलाती है और पहला भाव तय करती है, इसलिए समय या स्थान बदलने से कुंडली बदल जाती है।
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आपको किस सवाल का उत्तर चाहिए?
जन्म कुंडली का नमूना — चार्ट कैसे पढ़ें?
यह चित्र केवल चार्ट का ढाँचा समझाता है, आपका व्यक्तिगत फल नहीं। आपकी जन्म कुंडली की गणना जन्म तिथि, समय, स्थान और उस स्थान के सही समय क्षेत्र से होती है।

- पहले अपने नाम, जन्म तिथि, समय और चुने हुए जन्म स्थान की जाँच करें। सुबह और शाम का अंतर भी परिणाम बदल सकता है।
- अपने परिणाम की ग्रह-सारणी को चार्ट से मिलाएँ। राशि और भाव अलग जानकारी देते हैं; व्याख्या में दोनों का संदर्भ पूछें।
- जन्म समय नहीं पता हो तो सीमित व्याख्या चुनें। नमूना चित्र आपके लग्न, भाव या दशा के समय का प्रमाण नहीं है।
कोई बात स्पष्ट न हो तो अपनी कुंडली के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें कि कौन-सी ग्रह स्थिति उस पारंपरिक व्याख्या का आधार है।
दो वेबसाइटों की कुंडली अलग हो तो क्या जाँचें?
तुरंत दूसरी कुंडली को गलत मानने या नया उपाय चुनने से पहले यह क्रम अपनाएँ। अपनी दोनों ग्रह-सारणियाँ साथ रखें और फर्क लिखें।
- जन्म विवरण: दोनों चार्ट में तारीख, सुबह या शाम का समय और चुना गया जन्म स्थान एक ही रखें। परिवार का अनुमान हो तो उसे पक्का समय न मानें।
- गणना की सेटिंग: समय क्षेत्र, अयनांश और राशि-पद्धति मिलाएँ। केवल चार्ट का रंग या आकार बदलने से उसकी ग्रह-सारणी नहीं बदलनी चाहिए।
- ग्रह-सारणी: पहले ग्रहों की राशि और दिखाई गई डिग्री की तुलना करें। फिर भाव देखें; अलग चार्ट शैली में अंक का अर्थ अलग जगह लिखा हो सकता है।
- व्याख्या: यदि गणना समान है पर फल अलग है, तो पूछें कि किस नियम और किस ग्रह-संयोग से वह अर्थ निकाला गया। समान गणना किसी भविष्यवाणी की गारंटी नहीं है।
ग्रह-सारणी की एक पंक्ति पढ़ें: ग्रह का नाम, उसकी राशि और डिग्री, फिर भाव। राशि का अंक भाव का अंक नहीं है। केवल चंद्र राशि जाननी हो तो जन्म तिथि से राशि कैलकुलेटर खोलें। पूरी कुंडली में लग्न और भाव का संदर्भ भी ज़रूरी है।
जन्म समय की सीमा में लग्न, राशि और नक्षत्र की गणना तुलना करें (English)
जन्म समय अज्ञात हो तो लग्न, भाव या दशा के सटीक समय की तुलना को प्रमाण न मानें। जन्म रिकॉर्ड मिलने पर ही समय-निर्भर निष्कर्ष दोबारा जाँचें। कुंडली की तुलना की जाँच-सूची पढ़ें (English)
AI कुंडली विश्लेषण
आपके जीवन में वही पैटर्न बार-बार क्यों आ रहा है?
कुंडली उसके पीछे का भाव, ग्रह और दशा बताती है — फिर वह उपाय जिसे आप सच में अपना सकते हैं।
अपनी कुंडली से पूछें: मेरी कुंडली का कौन-सा पैटर्न मुझ पर सबसे ज़्यादा असर डाल रहा है?
आपकी कुंडली रिपोर्ट क्या दिखाएगी
- कौन-सा भाव और ग्रह बार-बार आने वाले पैटर्न को समझाता है।
- चल रही दशा करियर, शादी और पैसे का समय कैसे बदलती है।
- अंदाज़ा लगाने या ज़्यादा खर्च करने से पहले कौन-सा उपाय सही है।
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कुंडली रिपोर्ट में क्या शामिल है?
12 भाव
लग्न से पूरी जन्म पत्री
9 ग्रह
राशि, भाव, नक्षत्र और डिग्री
दोष और उपाय
मांगलिक, काल सर्प, साढ़े साती संकेत
कुंडली क्या है?
जन्म कुंडली (Janam Kundali) वैदिक ज्योतिष शास्त्र का आधार स्तंभ है। यह आपके जन्म के सटीक समय और स्थान पर आकाश में ग्रहों की स्थिति का एक खगोलीय मानचित्र है। कुंडली में नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की 12 भावों (स्थानों) में स्थिति दर्शाई जाती है। प्रत्येक भाव जीवन के एक विशिष्ट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है — व्यक्तित्व, धन, विवाह, जीविका, स्वास्थ्य से लेकर मोक्ष तक।
कुंडली का आधार लग्न (उदय राशि) होता है — यह वह राशि है जो आपके जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही थी। लग्न से ही सभी 12 भावों का निर्धारण होता है। पारंपरिक ज्योतिषी राशि चक्र (डी-1), नवमांश (डी-9) और अन्य वर्ग कुंडलियों का भी अध्ययन करते हैं। मांगलिक दोष, काल सर्प दोष, साढ़े साती जैसे दोषों की पहचान ग्रहों की विशेष स्थिति और संयोग से की जाती है।
हमारा निःशुल्क कुंडली सॉफ्टवेयर Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश से निरयन ग्रह-स्थितियाँ निकालता है। पद्धति और ग्रहों की डिग्री परिणाम में दिखाई जाती हैं, ताकि गणना को समझना और किसी ज्योतिषी के साथ जाँचना आसान हो। फल कथन पर सवाल हो तो AI ज्योतिषी चैट इसी गणना को पढ़कर उत्तर देता है; वह अनुभवी ज्योतिषी के संदर्भ-आधारित परामर्श का विकल्प नहीं है।
हमारा निःशुल्क कुंडली सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है
चरण 1 — जन्म विवरण दर्ज करें: अपनी जन्म तिथि, जन्म समय (यदि ज्ञात हो) और जन्म स्थान दें। जन्म स्थान को सटीक अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र में परिवर्तित किया जाता है ताकि ग्रह स्थिति आपके सही स्थान के लिए गणना हो सके।
चरण 2 — Swiss Ephemeris गणना: हमारा बैकएंड सभी नौ वैदिक ग्रहों की निरयन स्थिति Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश सुधार के साथ गणना करता है और परिणाम में ग्रहों की डिग्री दिखाता है।
चरण 3 — नियम-आधारित विश्लेषण: गणना इंजन लग्न, राशि, नक्षत्र, दशा और लागू योग-दोष संकेत तय नियमों से निकालता है। हर दोष संकेत के साथ उसका पारंपरिक अर्थ और सामान्य उपाय दिखते हैं।
चरण 4 — आपका परिणाम: कुंडली चार्ट, ग्रहों की डिग्री, दशा, दोष और योग हिंदी या अंग्रेज़ी में दिखते हैं। व्यक्तित्व, जीविका, विवाह या स्वास्थ्य पर व्यक्तिगत फल कथन चाहिए तो वह सवाल चैट में पूछें।
कुंडली बनने के बाद मुफ्त ज्योतिष चैट में जाकर ग्रह, दोष, दशा, विवाह, करियर या उपाय पर अपना अगला सवाल पूछ सकते हैं।
कुंडली में क्या-क्या देखा जाता है?
एक अनुभवी ज्योतिषी कुंडली खोलते ही चार चीज़ें सबसे पहले देखते हैं — लग्न, चंद्र राशि, जन्म नक्षत्र और चल रही दशा। इन्हीं चार स्तंभों पर पूरा फल कथन टिका होता है। नीचे समझिए कि प्रत्येक अंग कुंडली में क्या बताता है।
लग्न (उदय राशि): जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदय होती राशि। लग्न आपके व्यक्तित्व, शरीर-प्रकृति और जीवन की समग्र दिशा का सूचक है — इसी से बारहों भावों की गिनती शुरू होती है। लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए सटीक जन्म समय का इतना महत्व है।
राशि और नक्षत्र: चंद्र राशि आपके मन, भावनाओं और सहज प्रतिक्रियाओं का दर्पण है — वैदिक परंपरा में दशा और गोचर की गणना चंद्र से ही होती है। जन्म नक्षत्र (जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था) आपके स्वभाव की सूक्ष्म परतें, नामकरण का अक्षर और विवाह मिलान के गुण निर्धारित करता है।
12 भाव: प्रत्येक भाव जीवन के एक निश्चित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। जिस भाव में जितने शुभ ग्रह और जितना बलवान स्वामी, उस क्षेत्र में उतना सहज फल — परंपरा यही कहती है:
- प्रथम भाव (लग्न / तनु भाव): व्यक्तित्व, स्वभाव, शरीर और जीवन की समग्र दिशा।
- द्वितीय भाव (धन भाव): संचित धन, वाणी, कुटुंब और भोजन-संस्कार।
- तृतीय भाव (सहज भाव): पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहन और संवाद-कौशल।
- चतुर्थ भाव (सुख भाव): माता, घर, वाहन, भूमि और मानसिक शांति।
- पंचम भाव (संतान भाव): संतान, शिक्षा, बुद्धि, रचनात्मकता और पूर्व-पुण्य।
- षष्ठ भाव (रिपु भाव): रोग, ऋण, शत्रु, प्रतिस्पर्धा और दैनिक सेवा।
- सप्तम भाव (कलत्र भाव): विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी और सार्वजनिक संबंध।
- अष्टम भाव (आयु भाव): आयु, गूढ़ विद्या, अचानक परिवर्तन और विरासत।
- नवम भाव (भाग्य भाव): भाग्य, धर्म, गुरु, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राएँ।
- दशम भाव (कर्म भाव): कर्म, जीविका, पद-प्रतिष्ठा और समाज में स्थान।
- एकादश भाव (लाभ भाव): लाभ, आय के स्रोत, मित्र-मंडली और इच्छाओं की पूर्ति।
- द्वादश भाव (व्यय भाव): व्यय, विदेश-वास, एकांत, निद्रा और मोक्ष का मार्ग।
नवग्रह: सूर्य आत्मा और पिता के कारक हैं, चंद्र मन और माता के, मंगल ऊर्जा और साहस के, बुध बुद्धि और वाणी के, गुरु ज्ञान और भाग्य के, शुक्र प्रेम, विवाह और सुख के, शनि कर्म और अनुशासन के, जबकि राहु महत्वाकांक्षा-भ्रम और केतु वैराग्य-मोक्ष के छाया ग्रह माने जाते हैं। कौन-सा ग्रह किस भाव और किस राशि में बैठा है — यही संयोजन आपकी कुंडली को संसार में अद्वितीय बनाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली प्रवृत्तियाँ दिखाती है, बंधे हुए परिणाम नहीं — आपके कर्म और उपाय सदा मायने रखते हैं।
दो ऐप अलग-अलग कुंडली क्यों दिखाते हैं?
एक ही जन्म विवरण डालने पर दो ऐप या वेबसाइट कभी-कभी अलग लग्न, अलग नक्षत्र या अलग ग्रह-भाव दिखा देते हैं — और पढ़ने वाला समझ नहीं पाता कि किस पर भरोसा करे। जन्म विवरण की शुद्धता के अलावा गणना की सेटिंग में मुख्यतः तीन जगह अंतर आ सकता है:
1. अयनांश का चुनाव: सायन (पश्चिमी) राशि चक्र को निरयन (वैदिक) में बदलने के लिए अयनांश सुधार लगाना पड़ता है। लाहिरी और अन्य अयनांश पद्धतियों में सूक्ष्म अंतर होता है — राशि की सीमा के पास यही अंतर परिणाम बदल सकता है। हम लाहिरी अयनांश प्रयोग करते हैं और यह स्पष्ट लिखते हैं, ताकि आप जान सकें कि गणना किस पद्धति से हुई।
2. ग्रह स्थिति का स्रोत: अलग ephemeris, सेटिंग या गोलाई नियम ग्रहों की दिखाई गई डिग्री में अंतर ला सकते हैं। हमारा इंजन Swiss Ephemeris से स्थिति निकालता है और हर ग्रह की डिग्री दिखाता है; इससे स्रोत और परिणाम की तुलना छिपी हुई धारणा पर निर्भर नहीं रहती।
3. जन्म स्थान और समय क्षेत्र: जन्म स्थान को सटीक अक्षांश-देशांतर और उस समय के सही समय क्षेत्र में बदलना ज़रूरी है। जो ऐप शहर को मोटे तौर पर पकड़ता है या समय क्षेत्र का सुधार छोड़ देता है, उसका लग्न खिसक जाता है — क्योंकि लग्न मिनटों में संवेदनशील है।
इसलिए यदि दो कुंडलियाँ अलग दिखें, तो देखिए कि कौन-सा सॉफ्टवेयर अपना अयनांश और गणना-स्रोत खुलकर बताता है। ईश्वरम की हर कुंडली Swiss Ephemeris + लाहिरी अयनांश से बनती है और हर ग्रह की डिग्री तक आपको दिखाई जाती है — ताकि चाहें तो किसी भी पंचांग से मिलान कर सकें।
विंशोत्तरी महादशा — किस ग्रह की दशा कितने वर्ष
कुंडली सिर्फ यह नहीं बताती कि क्या है — यह बताती है कि कब। वैदिक ज्योतिष में समय की गणना विंशोत्तरी महादशा से होती है: 120 वर्ष का एक निश्चित चक्र जो नौ ग्रहों में बँटा है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसका स्वामी तय करता है कि आप कौन-सी महादशा में जन्मे। क्रम और वर्ष हर किसी के लिए एक जैसे हैं, बस शुरुआत का बिंदु अलग — इसीलिए हर व्यक्ति के जीवन में दशाओं का समय अलग पड़ता है:
| ग्रह | महादशा (वर्ष) |
|---|---|
| केतु (Ketu) | 7 वर्ष |
| शुक्र (Venus) | 20 वर्ष |
| सूर्य (Sun) | 6 वर्ष |
| चंद्र (Moon) | 10 वर्ष |
| मंगल (Mars) | 7 वर्ष |
| राहु (Rahu) | 18 वर्ष |
| गुरु (Jupiter) | 16 वर्ष |
| शनि (Saturn) | 19 वर्ष |
| बुध (Mercury) | 17 वर्ष |
| कुल | 120 वर्ष |
12 राशि और उनके स्वामी ग्रह
हर राशि का एक स्वामी ग्रह और एक तत्व होता है — यही राशि का मूल स्वभाव तय करता है। आपकी चंद्र राशि का स्वामी कहाँ और कितना बलवान बैठा है, यह कुंडली पढ़ने की पहली कुंजी है:
| राशि | स्वामी ग्रह | तत्व |
|---|---|---|
| मेष (Aries) | मंगल | अग्नि |
| वृषभ (Taurus) | शुक्र | पृथ्वी |
| मिथुन (Gemini) | बुध | वायु |
| कर्क (Cancer) | चंद्र | जल |
| सिंह (Leo) | सूर्य | अग्नि |
| कन्या (Virgo) | बुध | पृथ्वी |
| तुला (Libra) | शुक्र | वायु |
| वृश्चिक (Scorpio) | मंगल | जल |
| धनु (Sagittarius) | गुरु | अग्नि |
| मकर (Capricorn) | शनि | पृथ्वी |
| कुंभ (Aquarius) | शनि | वायु |
| मीन (Pisces) | गुरु | जल |
इंजन की गणनाएँ हर तिमाही स्वतंत्र पारंपरिक पंचांग स्रोतों से जाँची जाती हैं — पिछली जाँच को पास हुई। पूरी पद्धति देखें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जन्म कुंडली क्या होती है?
जन्म कुंडली एक वैदिक जन्म पत्री है जो आपके जन्म के सटीक समय और स्थान पर नवग्रहों की 12 भावों में स्थिति दर्शाती है। यह ज्योतिष शास्त्र का आधार है और पारंपरिक रूप से व्यक्तित्व समझने, जीवन की घटनाओं का पूर्वानुमान, विवाह के लिए कुंडली मिलान और दोषों की पहचान के लिए प्रयोग की जाती है।
ऑनलाइन कुंडली क्या पंडित जी की कुंडली जितनी सटीक है?
ग्रह-गणना की विश्वसनीयता सही जन्म विवरण, समय क्षेत्र, अयनांश और ग्रह-स्थिति स्रोत पर निर्भर करती है। ईश्वरम Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश से चार्ट बनाता है तथा ग्रहों की डिग्री दिखाता है, ताकि गणना की पद्धति स्पष्ट रहे। अनुभवी ज्योतिषी इसी चार्ट को जीवन-संदर्भ और परंपरा के साथ समझने में अतिरिक्त मूल्य देते हैं।
यदि मुझे अपना सटीक जन्म समय नहीं पता हो तो?
जन्म समय नहीं पता हो तो फ़ॉर्म में जन्म समय का वैकल्पिक खाना खाली छोड़ें; अनुमान से समय न भरें। आपको सीमित व्याख्या मिलेगी जिसमें सटीक जन्म समय पर निर्भर दावे नहीं होंगे। बिना सही समय के हम सटीक लग्न, भाव, वर्ग कुंडली या दशा का समय नहीं बताते। चंद्र राशि या नक्षत्र भी उसी दिन बदल सकते हैं, इसलिए उन्हें बिना जाँच निश्चित न मानें। अस्पताल का रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र मिल जाए तो विवरण दोबारा जाँचें।
जन्म तिथि से फ्री कुंडली ऑनलाइन कैसे बनाएं?
फ्री कुंडली ऑनलाइन बनाने के लिए नाम, जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान दर्ज करें। Ishvaram इन जन्म विवरणों से लग्न, राशि, नक्षत्र, 12 भाव, ग्रह डिग्री, दशा और दोष संकेत निकालता है। जन्म समय न हो तो उसका वैकल्पिक खाना खाली छोड़ें; सटीक लग्न, भाव और दशा के समय का दावा नहीं किया जाएगा।
कुंडली में दोष क्या होते हैं?
दोष आपकी कुंडली में विशिष्ट ग्रह संयोजन हैं जिन्हें वैदिक परंपरा में चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सबसे प्रचलित हैं — मांगलिक दोष (विशेष भावों में मंगल, जो विवाह को प्रभावित करता है), काल सर्प दोष (सभी ग्रह राहु-केतु के बीच), और साढ़े साती (शनि का चंद्र राशि पर 7.5 वर्ष का गोचर)। दोष स्वतः "बुरे" नहीं हैं — ये जीवन के उन क्षेत्रों को इंगित करते हैं जहाँ विशेष उपाय (मंत्र, रत्न, पूजा) सहायक हो सकते हैं।
क्या जन्म कुंडली से भविष्य (विवाह, जीविका) देखा जा सकता है?
वैदिक परंपरा में सप्तम भाव (साझेदारी, विवाह) और दशम भाव (कर्म, जीविका) को मुख्य सूचक माना जाता है। इन भावों के स्वामी ग्रह, उनकी गरिमा, दृष्टि और दशा काल का विश्लेषण करके घटनाओं के समय और स्वरूप को समझा जाता है। ज्योतिष प्रवृत्तियों और समय को समझने का ढाँचा प्रदान करता है — आपके प्रयास और निर्णय सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहाँ की निःशुल्क कुंडली में आपकी दशा, दोष और योग दिखते हैं; किसी विशेष प्रश्न का फल AI ज्योतिषी चैट में इसी कुंडली से पूछ सकते हैं।
कुंडली कैसे देखें?
कुंडली देखने का पारंपरिक क्रम है — सबसे पहले लग्न और लग्नेश (लग्न का स्वामी ग्रह), फिर 12 भावों में ग्रहों की स्थिति, और उसके बाद चल रही महादशा-अंतर्दशा। लग्न कुंडली की नींव है; चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र से मन-स्वभाव समझा जाता है, जबकि दशा से वर्तमान समय का स्वरूप। दोष (मांगलिक, काल सर्प, साढ़े साती) और शुभ योग इन्हीं के बाद देखे जाते हैं। हमारी कुंडली रिपोर्ट यही क्रम अपने आप प्रस्तुत करती है।
दो app या वेबसाइट अलग-अलग कुंडली क्यों दिखाती हैं?
अंतर जन्म विवरण, अयनांश के चुनाव, ग्रह-स्थिति स्रोत, समय क्षेत्र और गोलाई की पद्धति से आ सकता है। राशि की सीमा के पास अयनांश या जन्म समय का छोटा अंतर भी परिणाम बदल सकता है। ईश्वरम Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश से गणना करता है तथा हर ग्रह की डिग्री दिखाता है, ताकि आप पद्धति और परिणाम की तुलना कर सकें।
क्या जन्म कुंडली हर साल बदलती है?
नहीं — जन्म कुंडली जन्म के क्षण का स्थिर मानचित्र है, वह कभी नहीं बदलती। बदलता है ग्रहों का गोचर (वर्तमान चाल) और आपकी दशा-अंतर्दशा — इन्हीं से हर वर्ष का फल अलग होता है। इसीलिए वैदिक परंपरा में वार्षिक फल के लिए वर्षफल (वर्ष कुंडली) अलग से देखा जाता है, जबकि मूल जन्म पत्री जीवन भर एक ही रहती है।
मेरी अभी कौन-सी महादशा चल रही है, यह कैसे पता चलेगा?
विंशोत्तरी दशा जन्म नक्षत्र से शुरू होती है — जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसका स्वामी ग्रह आपकी पहली महादशा तय करता है, और वहीं से 120 वर्ष का निश्चित क्रम चलता है। इसलिए वर्तमान महादशा जानने के लिए सटीक जन्म विवरण चाहिए। ऊपर दिए फ़ॉर्म में जन्म तिथि, समय और स्थान भरकर कुंडली बनाएं — चल रही महादशा-अंतर्दशा की गणना Swiss Ephemeris आधारित इंजन से होती है, अनुमान से नहीं।
विंशोत्तरी दशा का चक्र 120 वर्ष का ही क्यों होता है?
परंपरा में 120 वर्ष मनुष्य की परमायु (पूर्ण आयु) मानी गई है — 'विंशोत्तरी' का अर्थ ही है एक सौ बीस। नौ ग्रहों की निश्चित अवधियाँ (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17) जोड़ने पर ठीक 120 वर्ष बनते हैं। यही क्रम 27 नक्षत्रों पर भी बैठता है — हर ग्रह ठीक तीन नक्षत्रों का स्वामी है, इसीलिए जन्म नक्षत्र से दशा का आरंभ-बिंदु तय होता है।
राशि का स्वामी ग्रह जानना कुंडली में क्यों ज़रूरी है?
कुंडली में हर भाव किसी राशि में पड़ता है, और उस भाव का फल बहुत हद तक उस राशि के स्वामी ग्रह की स्थिति और बल से जुड़ता है। इसीलिए परंपरा में 'लग्नेश', 'भाग्येश', 'दशमेश' जैसे शब्द चलते हैं — ये किसी भाव की राशि के स्वामी को ही इंगित करते हैं। उदाहरण के लिए, लग्न की राशि का स्वामी (लग्नेश) जहाँ बलवान बैठा हो, वहाँ व्यक्तित्व और स्वास्थ्य का फल सहज माना जाता है। ऊपर दी सारणी में अपनी राशि का स्वामी ग्रह और तत्व देख सकते हैं।
राहु और केतु किस राशि के स्वामी हैं?
राहु और केतु छाया ग्रह हैं — परंपरागत रूप से इन्हें किसी राशि का मुख्य स्वामित्व नहीं दिया जाता, इसलिए 12 राशियों के स्वामी सात ही ग्रह हैं: सूर्य और चंद्र एक-एक राशि के, जबकि मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि दो-दो राशियों के स्वामी हैं। कुछ परंपराएँ राहु को कुंभ और केतु को वृश्चिक का सह-स्वामी मानती हैं, पर मुख्य स्वामी शनि और मंगल ही रहते हैं। फल कथन में राहु-केतु प्रायः अपनी राशि, भाव और दृष्टि-संबंधों से पढ़े जाते हैं।
संबंधित ज्योतिष टूल
इस पेज को अकेले न पढ़ें। जन्म कुंडली, पंचांग, दशा और मुहूर्त के साथ मिलाने पर परिणाम अधिक उपयोगी होते हैं।