विवाह और जीवनसाथी
D9 का 7वाँ भाव और उसका स्वामी जीवनसाथी की प्रकृति बताते हैं। पुरुष के लिए नवांश में शुक्र, स्त्री के लिए बृहस्पति — जोड़ीदार का स्वभाव प्रकट करते हैं।
वैदिक ज्योतिष · नवांश (D9)
नवांश वैदिक ज्योतिष का 9वाँ षोडशवर्ग है — हर 30° राशि को 3°20' के 9 भागों में बाँटकर एक दूसरी 12-भाव कुंडली बनाई जाती है। यह कुंडली जन्म कुंडली के हर ग्रह की वास्तविक शक्ति को प्रकट करती है।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र में महर्षि पराशर ने नवांश को सर्वश्रेष्ठ षोडशवर्ग बताया है। जब कोई ग्रह D1 (जन्म कुंडली) में बलवान हो लेकिन D9 में निर्बल, तो उसका फल केवल ऊपरी होता है। जो ग्रह दोनों में बलवान हो, वही जीवन भर शुभ फल देता है।
आपके रिश्ते बार-बार एक ही राह पर क्यों जाते हैं? आपका करियर उतना क्यों नहीं बढ़ता जितना मेहनत है? इन प्रश्नों का उत्तर D1 में नहीं, नवांश में छिपा है — क्योंकि नवांश आत्मा के कर्म-पथ को दर्शाता है। करियर के प्रश्न पर परंपरा नवांश के साथ दशम भाव का वर्ग, दशमांश (D10), भी देखती है; उसके लिए D10 चार्ट कैलकुलेटर अलग से है।
D9 का 7वाँ भाव और उसका स्वामी जीवनसाथी की प्रकृति बताते हैं। पुरुष के लिए नवांश में शुक्र, स्त्री के लिए बृहस्पति — जोड़ीदार का स्वभाव प्रकट करते हैं।
D1 और D9 में एक ही राशि। वर्गोत्तम ग्रह अत्यंत बलशाली — जीवन भर स्थायी और शक्तिशाली फल देते हैं।
नवांश आत्मा के कर्म-पथ को दर्शाता है — इस जन्म में D1 जो अनुभव दे रही है, वह D9 के धर्म को व्यक्त करने के लिए है।
D1 के हर ग्रह को D9 में परखा जाता है। दोनों में बलवान = वास्तविक शक्ति; केवल D1 में = दिखावटी शक्ति।
प्रत्येक राशि 30° की होती है। इसे 9 बराबर भागों (3°20' प्रत्येक) में बाँटा जाता है। पहला भाग किस राशि से शुरू होगा यह ग्रह की मूल राशि के तत्व पर निर्भर है:
Ishvaram का इंजन Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश का उपयोग करके यह गणना स्वतः करता है। ऊपर दिए फ़ॉर्म में जन्म विवरण भरें और अपनी नवांश कुंडली तुरंत पाएं।
विवाह योग का सटीक विश्लेषण केवल D1 से नहीं, नवांश के साथ मिलाकर होता है। ज्योतिष की मान्यता है कि जो रिश्ता D9 में बलवान हो, वही जीवन भर टिकता है।
नवांश का 7वाँ भाव जीवनसाथी का स्वभाव, रूप और संस्कार बताता है। इस भाव पर शुभ ग्रह का प्रभाव = सुखी वैवाहिक जीवन।
पुरुष की कुंडली में नवांश स्थित शुक्र पत्नी की प्रकृति बताता है। स्त्री की कुंडली में नवांश स्थित बृहस्पति पति की प्रकृति दर्शाता है।
जन्म कुंडली (D1) के 7वें भाव का स्वामी नवांश (D9) में जिस भाव में हो, वह विवाह का समय और गुणवत्ता बताता है। शुभ भाव = शुभ विवाह काल।
नवांश (नव = नौ, अंश = भाग) वैदिक ज्योतिष का D9 षोडशवर्ग है। प्रत्येक 30° राशि को 9 भागों में बाँटा जाता है — प्रत्येक भाग 3°20' का। इस प्रकार एक दूसरी 12-भाव कुंडली बनती है जो जन्म कुंडली (D1) के हर ग्रह की गहरी परत को दर्शाती है — विशेष रूप से विवाह, धर्म और आत्मिक उद्देश्य।
नवांश जन्म कुंडली के वादे की आंतरिक गुणवत्ता दिखाता है। कोई ग्रह बाहर से मजबूत दिखे, फिर भी D9 में उसकी गरिमा कमजोर हो तो फल टिकाऊ नहीं रहता। इसलिए विवाह, धर्म, चरित्र और ग्रह-बल की पुष्टि में नवांश को अनिवार्य संदर्भ माना जाता है।
जब कोई ग्रह D1 और D9 दोनों में एक ही राशि में हो, तो वह वर्गोत्तम (वर्गों में श्रेष्ठ) कहलाता है। वर्गोत्तम ग्रह अत्यंत बलशाली माना जाता है — मानो वह अपनी स्वराशि में हो। ऐसे ग्रह जीवन में स्थायी और शक्तिशाली फल देते हैं।
तीन दृष्टिकोण से: (1) नवांश का 7वाँ भाव और उसका स्वामी — जीवनसाथी की प्रकृति बताता है। (2) पुरुष के लिए नवांश में शुक्र और स्त्री के लिए बृहस्पति — जीवनसाथी का स्वभाव दर्शाता है। (3) D1 के 7वें भाव का स्वामी नवांश में जहाँ हो — विवाह का समय और गुणवत्ता बताता है।
इसी पेज के कैलकुलेटर में जन्म तिथि, सटीक जन्म समय और सुझावों में से अपना जन्म शहर चुनें। परिणाम में D9 लग्न मिलता है, और लग्न व हर ग्रह के लिए D1 राशि (अंश और नक्षत्र सहित), D9 राशि, D9 भाव और अवस्था, तथा वर्गोत्तम और पुष्कर नवांश के संकेत। /hi/free-kundali/ की जन्म कुंडली में भी D9 नवांश शामिल है, और /kundli-matching/ पर दोनों पक्षों की नवांश कुंडली से गहन विवाह मिलान होता है।