बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा: फल, सावधानियाँ और उपाय
बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा का फल: वाणी में तेज़ी, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन, स्वास्थ्य और विवाद। शास्त्रीय संकेत, कुंडली के बिंदु और उपाय जानें।
एक नज़र में
- अंतर्दशा की अवधि
- 11 महीने 27 दिन
- महादशा के कुल वर्ष
- 17
आपकी बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा कब है?
अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।
बुध महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि
बुध महादशा के 17 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं बुध की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। मंगल की अंतर्दशा इस क्रम में छठी है और 11 महीने 27 दिन चलती है। इससे पहले चंद्र की और इसके बाद राहु की अंतर्दशा आती है।
बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ
मंगल की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो मंगल से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (2 महीने) और सबसे छोटी सूर्य की (18 दिन) है।
| क्रम | प्रत्यंतर दशा | अवधि |
|---|---|---|
| 1 | मंगल | 21 दिन |
| 2 | राहु | 1 महीना 24 दिन |
| 3 | गुरु | 1 महीना 18 दिन |
| 4 | शनि | 1 महीना 27 दिन |
| 5 | बुध | 1 महीना 21 दिन |
| 6 | केतु | 21 दिन |
| 7 | शुक्र | 2 महीने |
| 8 | सूर्य | 18 दिन |
| 9 | चंद्र | 1 महीना |
अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।
उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा
हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा की तिथियाँ 17 जनवरी 2052 से 14 जनवरी 2053 निकाली हैं।
ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।
बुध महादशा में मंगल की अंतर्दशा छठे क्रम पर आती है। इससे पहले बुध-चंद्र अंतर्दशा चलती है और इसके बाद बुध-राहु अंतर्दशा शुरू होती है। बुध के सत्रह वर्ष और मंगल के सात वर्ष के अनुपात से यह अंतर्दशा लगभग एक वर्ष की होती है। बुध बुद्धि, वाणी, गणना और व्यापार का ग्रह है, जबकि मंगल साहस, ऊर्जा, भूमि, भाई-बहन और संघर्ष का। नैसर्गिक मैत्री में बुध मंगल को सम मानता है, पर मंगल बुध को शत्रु मानता है, इसलिए यह जोड़ी तेज़ सोच और तेज़ प्रतिक्रिया दोनों साथ लाती है।
शास्त्रों में बताए गए फल
बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि मंगल केंद्र या त्रिकोण में, अपनी राशि या उच्च राशि में हो, तो बुध दशा में मंगल अंतर्दशा राजकृपा, भूमि और मकान का लाभ, भाई-बहनों से सुख और शत्रुओं पर विजय देती है। यदि मंगल छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, नीच का हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो ज्वर, रक्त से जुड़े रोग, अग्नि या शस्त्र से चोट, चोरों से भय, विवाद और मानसिक अशांति के संकेत दिए गए हैं। दूसरे या सातवें भाव का स्वामी होने पर मंगल स्वास्थ्य के लिए अधिक सावधानी माँगता है। कुंडली में सबसे पहले मंगल का तीसरे और चौथे भाव से संबंध देखें, क्योंकि भाई-बहन और भूमि के फल इन्हीं भावों से खुलते हैं। दशानाथ बुध से मंगल छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो, तो दोनों ग्रहों का बेमेल खुलकर सामने आता है और वाणी से विवाद बढ़ते हैं। बुध और मंगल की युति तर्कशक्ति बढ़ाती है, पर झगड़ालू स्वभाव भी दे सकती है। कर्क और सिंह लग्न में मंगल योगकारक होता है। मेष और वृश्चिक लग्न में वह लग्नेश है, और धनु व मीन लग्न में त्रिकोण का स्वामी, इसलिए इन लग्नों में भी प्रायः शुभ फल देता है।
करियर, संपत्ति, संबंध और स्वास्थ्य
इस समय निर्णय तेज़ी से होते हैं और काम में गति आती है। इंजीनियरिंग, तकनीकी काम, सेना, पुलिस, खेल, सर्जरी, निर्माण और भूमि से जुड़े व्यापार वालों के लिए यह अवधि सक्रिय रहती है। बुध की चतुराई और मंगल का साहस मिलकर बातचीत में दबदबा देते हैं, पर यही गुण कड़वी वाणी और जल्दबाज़ी में किए गए अनुबंधों में बदल सकता है। संपत्ति की ख़रीद-बिक्री में काग़ज़ों की पूरी जाँच करें और साझेदारी में लिखित शर्तें रखें। कर्ज़ लेकर बड़ा दाँव लगाने से बचें। भाई-बहनों, पड़ोसियों और सहकर्मियों से बहस की संभावना बढ़ती है। बुध वाणी का कारक है, इसलिए शब्दों पर संयम इस अंतर्दशा का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। स्वास्थ्य में त्वचा पर दाने, एलर्जी, बुखार, रक्तचाप, नसों की बेचैनी और छोटी चोटें ध्यान माँगती हैं। वाहन चलाते समय और धारदार औज़ारों के साथ काम करते समय अतिरिक्त सावधानी रखें। नियमित व्यायाम मंगल की ऊर्जा को सही दिशा देता है और मन की बेचैनी भी घटाता है।
उपाय
- मंगलवार को मंगल मंत्र का जप और हनुमान चालीसा का पाठ।
- मंगलवार को लाल मसूर, गुड़ या लाल वस्त्र का दान।
- बुध को संतुलित रखने के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गाय को हरा चारा।
- क्रोध आए तो निर्णय टालना और बोलने से पहले रुकना।