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बुध महादशा में राहु अंतर्दशा: करियर, विदेश, जोखिम और उपाय

बुध महादशा में राहु अंतर्दशा का करियर, व्यापार, विदेश, संबंध और स्वास्थ्य पर फल, राहु की राशि और भाव का महत्व तथा इस समय के पारंपरिक उपाय जानें।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
2 साल 6 महीने 18 दिन
महादशा के कुल वर्ष
17

आपकी बुध महादशा में राहु अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

बुध महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

बुध महादशा के 17 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं बुध की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। राहु की अंतर्दशा इस क्रम में सातवीं है और 2 साल 6 महीने 18 दिन चलती है। इससे पहले मंगल की और इसके बाद गुरु की अंतर्दशा आती है।

बुध महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1बुध2 साल 4 महीने 27 दिन
2केतु11 महीने 27 दिन
3शुक्र2 साल 10 महीने
4सूर्य10 महीने 6 दिन
5चंद्र1 साल 5 महीने
6मंगल11 महीने 27 दिन
7राहु (यह पृष्ठ)2 साल 6 महीने 18 दिन
8गुरु2 साल 3 महीने 6 दिन
9शनि2 साल 8 महीने 9 दिन

बुध महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

राहु की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो राहु से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (5 महीने 3 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (1 महीना 16 दिन) है।

बुध महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1राहु4 महीने 18 दिन
2गुरु4 महीने 2 दिन
3शनि4 महीने 25 दिन
4बुध4 महीने 10 दिन
5केतु1 महीना 24 दिन
6शुक्र5 महीने 3 दिन
7सूर्य1 महीना 16 दिन
8चंद्र2 महीने 17 दिन
9मंगल1 महीना 24 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने बुध महादशा में राहु अंतर्दशा की तिथियाँ 14 जनवरी 2053 से 3 अगस्त 2055 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

बुध बुद्धि, वाणी, गणना और व्यापार का ग्रह है, जबकि राहु महत्वाकांक्षा, असामान्य रास्तों, विदेश और भ्रम का। यह मेल तेज दिमाग को बड़े लक्ष्य देता है, पर निर्णय में जल्दबाजी का खतरा भी लाता है।

बुध में राहु का फल राशि और भाव से

राहु छाया ग्रह है, इसलिए पाराशरी नियम के अनुसार वह जिस भाव और राशि में बैठा हो और जिन ग्रहों के साथ हो, उन्हीं के अनुसार फल देता है। राहु यदि बुध की राशि मिथुन या कन्या में हो, बुध के साथ हो, या केंद्र-त्रिकोण में शुभ ग्रहों से जुड़ा हो, तो यह समय नई तकनीक, विदेशी संपर्क और बड़े अवसर दे सकता है। तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में राहु प्रायः अच्छा फल देता है, क्योंकि ये भाव संघर्ष और लाभ के हैं। राहु यदि बुध से छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो, अष्टम भाव में हो, या चंद्र के साथ पीड़ित हो, तो भ्रम, अनिद्रा, धोखे और अचानक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

बुध-राहु काल में करियर, धन और संबंध

  • करियर और व्यापार: सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा, मीडिया, विपणन, आयात-निर्यात और विदेशी कंपनियों से जुड़े काम में तेजी आ सकती है। नौकरी या काम की दिशा अचानक बदलना इस समय आम है।
  • धन: सट्टा, जल्दी पैसा बनाने वाली योजनाएं और बिना जांचे निवेश सबसे बड़ा जोखिम हैं। किसी भी अनुबंध पर हस्ताक्षर से पहले उसकी शर्तें ध्यान से पढ़ें।
  • शिक्षा और विदेश: विदेश में पढ़ाई, शोध या नई भाषा सीखने के अवसर बन सकते हैं। राहु बाहरी संस्कृति की ओर खिंचाव बढ़ाता है।
  • संबंध: कही गई बात का गलत अर्थ निकलना और छिपी बातों से अविश्वास पैदा होना संभव है। साफ और सीधी बातचीत रिश्तों को बचाती है, और जरूरी बातें लिखित रूप में रखना भी उपयोगी है।
  • स्वास्थ्य: बुध त्वचा और बुद्धि का कारक है, और राहु मन में बेचैनी और भ्रम बढ़ाता है। चिंता, अनिद्रा, त्वचा की एलर्जी और अधिक स्क्रीन से होने वाली थकान पर ध्यान दें।

बुध-राहु अंतर्दशा के उपाय

बुध को बल देने के लिए बुधवार को "ॐ बुं बुधाय नमः" का जाप और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। राहु के लिए देवी दुर्गा की उपासना, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ और "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का जाप बताया जाता है। नशे और अनैतिक रास्तों से दूरी रखना राहु का सबसे व्यावहारिक उपाय है। बुध का रत्न पन्ना और राहु का गोमेद है। राहु की अंतर्दशा में गोमेद विशेष सावधानी से और कुंडली में राहु के भाव की जांच के बाद ही धारण करें। यह वैकल्पिक है और कुछ भी खरीदना आवश्यक नहीं; कोई भी रत्न पहनने से पहले ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

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