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बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा: मन, परिवार, व्यापार और उपाय

बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा का मन, माता, घर, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फल, चंद्र की स्थिति का महत्व और इस समय के पारंपरिक उपाय जानें।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
1 साल 5 महीने
महादशा के कुल वर्ष
17

आपकी बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

बुध महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

बुध महादशा के 17 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं बुध की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। चंद्र की अंतर्दशा इस क्रम में पाँचवीं है और 1 साल 5 महीने चलती है। इससे पहले सूर्य की और इसके बाद मंगल की अंतर्दशा आती है।

बुध महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1बुध2 साल 4 महीने 27 दिन
2केतु11 महीने 27 दिन
3शुक्र2 साल 10 महीने
4सूर्य10 महीने 6 दिन
5चंद्र (यह पृष्ठ)1 साल 5 महीने
6मंगल11 महीने 27 दिन
7राहु2 साल 6 महीने 18 दिन
8गुरु2 साल 3 महीने 6 दिन
9शनि2 साल 8 महीने 9 दिन

बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

चंद्र की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो चंद्र से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (2 महीने 25 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (26 दिन) है।

बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1चंद्र1 महीना 13 दिन
2मंगल1 महीना
3राहु2 महीने 17 दिन
4गुरु2 महीने 8 दिन
5शनि2 महीने 21 दिन
6बुध2 महीने 12 दिन
7केतु1 महीना
8शुक्र2 महीने 25 दिन
9सूर्य26 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा की तिथियाँ 18 अगस्त 2050 से 17 जनवरी 2052 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

बुध तर्क, वाणी और व्यापार का ग्रह है, जबकि चंद्र मन, माता, भावनाओं और जनता का। इस अवधि में सोच और भावना दोनों एक साथ सक्रिय रहती हैं।

चंद्र की शक्ति से बदलता फल

पाराशरी नैसर्गिक मैत्री में चंद्र बुध को मित्र मानता है, पर बुध चंद्र को शत्रु मानता है। इस असमान संबंध के कारण परिणाम बहुत हद तक चंद्र की शक्ति पर टिके रहते हैं। चंद्र यदि वृषभ में उच्च का हो, कर्क में अपनी राशि में हो, शुक्ल पक्ष का बलवान चंद्र हो, या बुध से केंद्र-त्रिकोण में हो, तो यह समय जनसंपर्क, व्यापार, लेखन और पारिवारिक सुख में अच्छा फल देता है। चंद्र यदि वृश्चिक में नीच का हो, क्षीण हो, राहु-केतु या शनि से पीड़ित हो, या बुध से छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो, तो बेचैनी, अधिक सोच और भावनात्मक उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं। चंद्र जिस भाव का स्वामी है, उस भाव के विषय भी इस समय आगे आते हैं।

बुध-चंद्र काल में मन, घर और काम

  • करियर और व्यापार: लोगों से जुड़े काम जैसे बिक्री, शिक्षण, परामर्श, लेखन, आतिथ्य, खाद्य और जल से संबंधित व्यवसाय में प्रगति हो सकती है। जनता से संपर्क बढ़ता है।
  • परिवार और घर: माता, घर और वाहन से जुड़े विषय प्रमुख रहते हैं। घर बदलना, नवीनीकरण या माता के स्वास्थ्य की चिंता इस समय के आम विषय हैं।
  • शिक्षा और यात्रा: पढ़ाई में मन लगता है, पर एकाग्रता मन की स्थिति पर निर्भर रहती है। छोटी यात्राएं और तीर्थ यात्रा के योग बन सकते हैं।
  • संबंध: भावनाएं जल्दी आहत हो सकती हैं। तर्क से ज्यादा सहानुभूति से बात करने पर पारिवारिक रिश्ते बेहतर रहते हैं।
  • स्वास्थ्य: चंद्र वात-कफ प्रकृति का और मन का कारक है, जबकि बुध त्वचा का। नींद की कमी, चिंता, सर्दी-जुकाम और त्वचा की संवेदनशीलता पर ध्यान दें।

चंद्र और बुध को संतुलित करने के उपाय

चंद्र के लिए सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक, "ॐ सों सोमाय नमः" मंत्र का जाप और चावल, दूध या सफेद वस्त्र का दान पारंपरिक उपाय है। माता और बुजुर्ग महिलाओं की सेवा चंद्र को बल देती है। बुध के लिए बुधवार को हरी मूंग या हरे वस्त्र का दान किया जाता है। नियमित नींद, ध्यान और डायरी लिखना मन को स्थिर रखने में सहायक है। सोमवार का व्रत भी चंद्र के लिए पारंपरिक रूप से रखा जाता है। मोती चंद्र का और पन्ना बुध का रत्न है, पर इन्हें दोनों ग्रहों के भाव-स्वामित्व की जांच के बाद ही पहनें। यह वैकल्पिक है और कुछ भी खरीदना आवश्यक नहीं; कोई भी रत्न पहनने से पहले ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

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