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शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा: फल, सावधानियाँ और उपाय

शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा के शास्त्रीय फल: भूमि, विवाद, चोट और करियर पर असर, कर्क-सिंह लग्न में योगकारक मंगल, कुंडली के बिंदु और उपाय।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
1 साल 1 महीना 9 दिन
महादशा के कुल वर्ष
19

आपकी शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

शनि महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

शनि महादशा के 19 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं शनि की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। मंगल की अंतर्दशा इस क्रम में सातवीं है और 1 साल 1 महीना 9 दिन चलती है। इससे पहले चंद्र की और इसके बाद राहु की अंतर्दशा आती है।

शनि महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1शनि3 साल 3 दिन
2बुध2 साल 8 महीने 9 दिन
3केतु1 साल 1 महीना 9 दिन
4शुक्र3 साल 2 महीने
5सूर्य11 महीने 12 दिन
6चंद्र1 साल 7 महीने
7मंगल (यह पृष्ठ)1 साल 1 महीना 9 दिन
8राहु2 साल 10 महीने 6 दिन
9गुरु2 साल 6 महीने 12 दिन

शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

मंगल की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो मंगल से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (2 महीने 7 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (20 दिन) है।

शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1मंगल23 दिन
2राहु2 महीने
3गुरु1 महीना 23 दिन
4शनि2 महीने 3 दिन
5बुध1 महीना 27 दिन
6केतु23 दिन
7शुक्र2 महीने 7 दिन
8सूर्य20 दिन
9चंद्र1 महीना 3 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा की तिथियाँ 20 जनवरी 2037 से 1 मार्च 2038 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

शनि महादशा में मंगल की अंतर्दशा सातवें क्रम पर आती है। इससे पहले शनि-चंद्र अंतर्दशा चलती है और इसके बाद शनि-राहु अंतर्दशा शुरू होती है। शनि के उन्नीस वर्ष और मंगल के सात वर्ष के अनुपात से यह लगभग एक वर्ष एक महीने की होती है। शनि धीमा, ठंडा और संयमी ग्रह है, जबकि मंगल तेज़, गर्म और आक्रामक। नैसर्गिक मैत्री में शनि मंगल को शत्रु मानता है और मंगल शनि को सम, इसलिए यह संयोजन शनि महादशा की अधिक सावधानी माँगने वाली अंतर्दशाओं में गिना जाता है।

शास्त्रों में बताए गए फल

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार शनि दशा में मंगल अंतर्दशा के सामान्य फल हैं: पद या स्थान की हानि, भाई-बहनों से कलह, अग्नि, चोर या शस्त्र से भय, ज्वर, रक्त और पित्त से जुड़ी तकलीफ़ें, और शत्रुओं से परेशानी। ये फल तब अधिक होते हैं जब मंगल छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, नीच का हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो। यदि मंगल केंद्र या त्रिकोण में, अपनी या उच्च राशि में हो और शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो भूमि-लाभ, वाहन, साहसिक कार्यों में सफलता और अधिकार मिलने के योग भी बनते हैं। कुंडली में सबसे पहले शनि और मंगल का आपसी संबंध देखें। दोनों की युति, एक-दूसरे से सातवें स्थान पर होना, या शनि की तीसरी व दसवीं और मंगल की चौथी व आठवीं विशेष दृष्टि से बना संबंध, चोट और विवाद की संभावना बढ़ाता है। मंगल चौथे भाव का स्वामी हो या उसमें बैठा हो, तो भूमि-जायदाद के मामले इसी अवधि में उठते हैं। कर्क और सिंह लग्न में मंगल योगकारक होता है, इसलिए इन लग्नों में यह अंतर्दशा संघर्ष के बाद पद और संपत्ति भी दे सकती है।

करियर, भूमि, विवाद और स्वास्थ्य

शनि की अनुशासित मेहनत और मंगल की कार्य-शक्ति मिलकर निर्माण, इंजीनियरिंग, खनन, मशीनरी, सेना, पुलिस, सुरक्षा और भूमि से जुड़े कामों में ठोस परिणाम दे सकती हैं। पर इन दोनों ग्रहों का टकराव जल्दबाज़ी और रुकावट के बीच खिंचाव भी पैदा करता है। वरिष्ठों से टकराव, नौकरी में अचानक तबादला, ज़मीन-जायदाद के विवाद और अदालती मामले इस दौर में उभर सकते हैं। किसी भी क़ानूनी या संपत्ति के मामले में पूरे काग़ज़ और लिखित सहमति रखें, और गुस्से में इस्तीफ़ा या बड़ा निर्णय न लें। मंगल चोट, कटने, जलने, शल्य चिकित्सा और रक्त का कारक है, और शनि हड्डियों, जोड़ों और लंबे रोगों का। दोनों का मेल दुर्घटना, फ्रैक्चर, मांसपेशियों में खिंचाव या पुराने दर्द के उभरने का संकेत देता है। वाहन, मशीन, आग और ऊँचाई से जुड़े काम में अतिरिक्त सावधानी रखें। रक्तचाप की नियमित जाँच करें। संयमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और क्रोध पर नियंत्रण इस अंतर्दशा में सबसे व्यावहारिक सुरक्षा हैं।

उपाय

  • मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ और मंगल मंत्र का जप।
  • शनिवार को शनि मंत्र का जप और सरसों के तेल का दान।
  • मंगलवार को लाल मसूर या गुड़, और शनिवार को काले तिल का दान।
  • भाई-बहनों से संबंध सुधारना और ज़मीन के मामलों में समझौते का रास्ता चुनना।
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