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शनि महादशा में राहु अंतर्दशा: फल, सावधानियाँ और उपाय

शनि महादशा में राहु अंतर्दशा के शास्त्रीय फल, करियर, धन और स्वास्थ्य पर असर, कुंडली में देखने योग्य बातें और राहु-शनि शांति के सरल उपाय जानें।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
2 साल 10 महीने 6 दिन
महादशा के कुल वर्ष
19

आपकी शनि महादशा में राहु अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

शनि महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

शनि महादशा के 19 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं शनि की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। राहु की अंतर्दशा इस क्रम में आठवीं है और 2 साल 10 महीने 6 दिन चलती है। इससे पहले मंगल की और इसके बाद गुरु की अंतर्दशा आती है।

शनि महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1शनि3 साल 3 दिन
2बुध2 साल 8 महीने 9 दिन
3केतु1 साल 1 महीना 9 दिन
4शुक्र3 साल 2 महीने
5सूर्य11 महीने 12 दिन
6चंद्र1 साल 7 महीने
7मंगल1 साल 1 महीना 9 दिन
8राहु (यह पृष्ठ)2 साल 10 महीने 6 दिन
9गुरु2 साल 6 महीने 12 दिन

शनि महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

राहु की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो राहु से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (5 महीने 21 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (1 महीना 21 दिन) है।

शनि महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1राहु5 महीने 4 दिन
2गुरु4 महीने 17 दिन
3शनि5 महीने 12 दिन
4बुध4 महीने 25 दिन
5केतु2 महीने
6शुक्र5 महीने 21 दिन
7सूर्य1 महीना 21 दिन
8चंद्र2 महीने 26 दिन
9मंगल2 महीने

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने शनि महादशा में राहु अंतर्दशा की तिथियाँ 1 मार्च 2038 से 5 जनवरी 2041 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

विंशोत्तरी दशा में शनि महादशा के भीतर राहु की अंतर्दशा आठवें क्रम पर आती है। इससे पहले शनि-मंगल अंतर्दशा चलती है और इसके बाद शनि-गुरु अंतर्दशा शुरू होती है। इसकी अवधि शनि के उन्नीस वर्ष और राहु के अठारह वर्ष के अनुपात से बनती है, इसलिए यह लगभग दो वर्ष दस महीने तक चलती है और शनि महादशा की लंबी अंतर्दशाओं में गिनी जाती है। ज्योतिष परंपरा में कहा गया है कि राहु शनि के समान फल देता है, इसलिए यह जोड़ी गंभीर, कर्म-प्रधान और धीरे-धीरे परिणाम देने वाली मानी जाती है।

शास्त्रों में बताए गए फल

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार शनि दशा में राहु की अंतर्दशा के सामान्य फल कष्टदायक बताए गए हैं: घर में कलह, मानसिक चिंता, शत्रुओं का भय, धन की हानि, शारीरिक पीड़ा और अपने स्थान से दूर भटकना। जब राहु आठवें या बारहवें भाव में हो, या पाप ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, तब ये फल अधिक तीव्र होते हैं। इसके विपरीत, यदि राहु केंद्र, त्रिकोण, तीसरे या ग्यारहवें भाव में हो और शुभ ग्रहों का प्रभाव उस पर हो, तो इसी अवधि में शासन से लाभ, भूमि प्राप्ति, तीर्थयात्रा और अप्रत्याशित आय के योग भी बनते हैं। अपनी कुंडली में सबसे पहले देखें कि राहु किस भाव और राशि में है और उस राशि का स्वामी कितना बलवान है। शनि से राहु छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो तो फल कठिन होते हैं, जबकि राहु पर गुरु की दृष्टि या युति इसके नकारात्मक असर को काफ़ी घटा देती है। उच्च, स्वराशि या योगकारक शनि पूरी महादशा को सहारा देता है, और इसी समय चल रहे शनि व राहु के गोचर घटनाओं का समय तय करते हैं।

करियर, धन, स्वास्थ्य और परिवार

कामकाज में अचानक बदलाव इस अंतर्दशा की पहचान है। संस्था का ढाँचा बदलना, वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद, नियम-कानून से जुड़ी अड़चनें, विदेश या दूर स्थान से जुड़ा काम और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर, ये सब सामने आ सकते हैं। शनि धैर्य और लगातार मेहनत माँगता है, जबकि राहु जल्दी सफलता के आसान रास्तों की ओर खींचता है। जो लोग नियमों के भीतर रहकर व्यवस्थित काम करते हैं, उन्हें इस समय स्थायी पद और पहचान मिल सकती है। सट्टा, बिना जाँचे निवेश, बड़ा उधार और कागज़ों में ढील, इस दौर में सबसे अधिक नुकसान पहुँचाते हैं। शनि वात, जोड़ों, हड्डियों और लंबे चलने वाले रोगों का कारक है, जबकि राहु ऐसी तकलीफ़ें देता है जिनका कारण जल्दी पकड़ में नहीं आता, जैसे अनिद्रा, बेचैनी, संक्रमण या दवा का उल्टा असर। नियमित जाँच, संतुलित भोजन और नशे से दूरी इस समय विशेष रूप से ज़रूरी है। परिवार में ग़लतफ़हमी और संदेह बढ़ सकते हैं, इसलिए बात को छिपाने के बजाय साफ़ कहना बेहतर रहता है। मन पर भारीपन या अकेलेपन की भावना आए, तो उसे अनदेखा न करें।

उपाय

  • राहु के बीज मंत्र का नियमित जप, और शनिवार को शनि मंत्र का पाठ।
  • शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, कंबल या उड़द का दान ज़रूरतमंदों को।
  • परंपरा के अनुसार राहु शांति के लिए दुर्गा उपासना और हनुमान चालीसा का पाठ।
  • झूठ, छिपे लेन-देन और नशे से दूरी, जिसे शनि-राहु दोनों के लिए सबसे असरदार उपाय माना जाता है।
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