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शनि महादशा में बुध अंतर्दशा: करियर, शिक्षा और उपाय

शनि महादशा में बुध अंतर्दशा के शास्त्रीय फल: व्यापार, शिक्षा, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य पर असर, कुंडली में देखने योग्य बातें और विष्णु सहस्रनाम जैसे उपाय।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
2 साल 8 महीने 9 दिन
महादशा के कुल वर्ष
19

आपकी शनि महादशा में बुध अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

शनि महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

शनि महादशा के 19 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं शनि की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। बुध की अंतर्दशा इस क्रम में दूसरी है और 2 साल 8 महीने 9 दिन चलती है। इससे पहले शनि की और इसके बाद केतु की अंतर्दशा आती है।

शनि महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1शनि3 साल 3 दिन
2बुध (यह पृष्ठ)2 साल 8 महीने 9 दिन
3केतु1 साल 1 महीना 9 दिन
4शुक्र3 साल 2 महीने
5सूर्य11 महीने 12 दिन
6चंद्र1 साल 7 महीने
7मंगल1 साल 1 महीना 9 दिन
8राहु2 साल 10 महीने 6 दिन
9गुरु2 साल 6 महीने 12 दिन

शनि महादशा में बुध अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

बुध की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो बुध से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (5 महीने 12 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (1 महीना 18 दिन) है।

शनि महादशा में बुध अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1बुध4 महीने 17 दिन
2केतु1 महीना 27 दिन
3शुक्र5 महीने 12 दिन
4सूर्य1 महीना 18 दिन
5चंद्र2 महीने 21 दिन
6मंगल1 महीना 27 दिन
7राहु4 महीने 25 दिन
8गुरु4 महीने 9 दिन
9शनि5 महीने 3 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने शनि महादशा में बुध अंतर्दशा की तिथियाँ 22 जुलाई 2027 से 31 मार्च 2030 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

शनि महादशा में बुध की अंतर्दशा दूसरे क्रम पर आती है। यह शनि-शनि अंतर्दशा के ठीक बाद शुरू होती है और इसके बाद शनि-केतु अंतर्दशा आती है। शनि के उन्नीस वर्ष और बुध के सत्रह वर्ष के अनुपात से यह लगभग दो वर्ष आठ महीने चलती है। नैसर्गिक मैत्री में शनि बुध को मित्र मानता है और बुध शनि को सम, इसलिए यह शनि महादशा की अपेक्षाकृत सहायक अंतर्दशाओं में गिनी जाती है। शनि-शनि के भारी दौर के बाद बहुत से लोगों को इस समय काम में स्थिरता और मन में हल्कापन महसूस होता है।

शास्त्रों में बताए गए फल

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि बुध केंद्र या त्रिकोण में, अपनी राशि या उच्च राशि में हो, तो शनि दशा में बुध अंतर्दशा प्रतिष्ठा, सुख-सुविधा, धन-लाभ, विद्या में सफलता, अच्छे स्वास्थ्य और धार्मिक कार्यों में रुचि देती है। व्यापार बढ़ता है और परिवार में शुभ कार्य होते हैं। यदि बुध छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, नीच का हो, अस्त हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो धन की हानि, मानसिक चिंता, काम में रुकावट और विवाद के फल बताए गए हैं। कुंडली में बुध का दूसरे, पाँचवें, नौवें या दसवें भाव से संबंध हो, तो वाणी, विद्या, भाग्य और कर्म से जुड़े लाभ इसी अवधि में मिलते हैं। बुध सूर्य से कभी दूर नहीं जाता, इसलिए वह अक्सर अस्त मिलता है। अस्त बुध हो, या वह शनि से छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो, तो लिखित काम और हिसाब में भूलें बढ़ती हैं। वृषभ और तुला लग्न में शनि योगकारक होता है, इसलिए इन लग्नों में यह अंतर्दशा अक्सर विशेष शुभ रहती है। दूसरे या सातवें भाव का स्वामी होने पर बुध मारक भी बन सकता है, ऐसे में स्वास्थ्य पर ध्यान रखें।

करियर, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार

शनि अनुशासन, सेवा और लंबी मेहनत देता है, जबकि बुध गणना, लेखन, संचार, व्यापार और विश्लेषण देता है। यह मेल लेखा-जोखा, कानून, प्रशासन, शोध, सॉफ़्टवेयर, डेटा, प्रकाशन और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी रहता है। परीक्षा, पेशेवर प्रमाणपत्र या किसी नए कौशल की पढ़ाई इस समय धीमी पर पक्की प्रगति देती है। अनुबंध, दस्तावेज़ और हिसाब में सावधानी रखें, क्योंकि पीड़ित बुध काग़ज़ी भूल या ग़लत सलाह से नुकसान दे सकता है। बुध नसों, त्वचा और वाणी का कारक है, और शनि वात व थकान का। इसलिए लगातार काम का तनाव, नींद की कमी, त्वचा की समस्या या नसों में खिंचाव ध्यान माँग सकते हैं। बच्चों की पढ़ाई, छोटे भाई-बहनों और मित्रों से जुड़े विषय इस समय अधिक सामने आते हैं। मामा पक्ष से जुड़े मामले भी सक्रिय हो सकते हैं, क्योंकि बुध को मामा का कारक माना गया है।

उपाय

  • विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ, जो बुध की अंतर्दशा के लिए शास्त्रों में सुझाया गया है।
  • बुधवार को हरी मूँग, हरे वस्त्र या पढ़ाई की सामग्री का दान।
  • शनिवार को शनि मंत्र का जप और ज़रूरतमंद श्रमिकों की सहायता।
  • वाणी में सच्चाई और हिसाब-किताब में पूरी ईमानदारी।
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