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मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा: प्रेम, धन और उपाय

मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा लगभग एक साल दो महीने चलती है। जानिए विवाह, संपत्ति और धन पर इसके शुभ-अशुभ फल और शुक्र-मंगल के सरल उपाय।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
1 साल 2 महीने
महादशा के कुल वर्ष
7

आपकी मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

मंगल महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

मंगल महादशा के 7 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं मंगल की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। शुक्र की अंतर्दशा इस क्रम में सातवीं है और 1 साल 2 महीने चलती है। इससे पहले केतु की और इसके बाद सूर्य की अंतर्दशा आती है। नौ अंतर्दशाओं में यह सबसे लंबी है।

मंगल महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1मंगल4 महीने 27 दिन
2राहु1 साल 18 दिन
3गुरु11 महीने 6 दिन
4शनि1 साल 1 महीना 9 दिन
5बुध11 महीने 27 दिन
6केतु4 महीने 27 दिन
7शुक्र (यह पृष्ठ)1 साल 2 महीने
8सूर्य4 महीने 6 दिन
9चंद्र7 महीने

मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

शुक्र की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो शुक्र से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (2 महीने 10 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (21 दिन) है।

मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1शुक्र2 महीने 10 दिन
2सूर्य21 दिन
3चंद्र1 महीना 5 दिन
4मंगल25 दिन
5राहु2 महीने 3 दिन
6गुरु1 महीना 26 दिन
7शनि2 महीने 7 दिन
8बुध2 महीने
9केतु25 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा की तिथियाँ 12 जून 1988 से 12 अगस्त 1989 निकाली हैं। यह अवधि जन्म से पहले बीत चुकी थी।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

विंशोत्तरी दशा में मंगल की महादशा सात वर्ष की होती है और इसके भीतर शुक्र की अंतर्दशा लगभग एक साल दो महीने चलती है। क्रम में यह केतु की अंतर्दशा के बाद आती है और इसके बाद सूर्य की अंतर्दशा शुरू होती है। मंगल साहस, ऊर्जा, भूमि, भाई और प्रतिस्पर्धा का कारक है, जबकि शुक्र प्रेम, विवाह, वाहन, सुख-सुविधा और कला का। मंगल और शुक्र एक-दूसरे के प्रति सम भाव रखते हैं, इसलिए इस अवधि का फल लगभग पूरी तरह कुंडली में दोनों ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संबंध पर निर्भर करता है। मेष लग्न वालों के लिए शुक्र दूसरे और सातवें भाव का स्वामी होता है, इसलिए उनके लिए यह अंतर्दशा विवाह और धन दोनों विषयों को सीधे सक्रिय करती है। मंगल महादशा में शुक्र सातवीं अंतर्दशा है, जो महादशा के लगभग पाँच वर्ष बीतने पर शुरू होती है; इसके बाद केवल सूर्य और चंद्र की अंतर्दशाएँ शेष रहती हैं।

शुक्र बलवान हो तो फल: विवाह, संपत्ति और करियर

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि शुक्र उच्च, स्वराशि, केंद्र या त्रिकोण में हो, अथवा मंगल से शुभ स्थान पर हो, तो इस अंतर्दशा में धन-लाभ, वाहन, वस्त्र और आभूषण का सुख, तथा विवाह या संतान से जुड़े शुभ समाचार मिलते हैं। मंगल की महादशा में जो कठोरता और संघर्ष रहता है, उसे शुक्र कुछ नरम बनाता है। भूमि, भवन, सजावट, वाहन या सौंदर्य से जुड़े व्यवसाय में प्रगति के योग बनते हैं और साझेदारी से भी लाभ मिल सकता है। यह अंतर्दशा प्रेम संबंधों और विवाह के लिए सक्रिय समय मानी जाती है, क्योंकि मंगल पहल करता है और शुक्र आकर्षण देता है। फिर भी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में टकराव का कारण बन सकता है, इसलिए कुंडली मिलान और परिवार की सहमति को महत्व दें। संपत्ति खरीदने या घर सजाने की इच्छा बढ़ती है; दस्तावेज अच्छी तरह जाँचकर ही सौदा करें। करियर में सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, खेल, फैशन या मनोरंजन से जुड़े लोगों को अपेक्षाकृत अच्छे अवसर मिलते हैं।

शुक्र निर्बल हो तो सावधानियाँ

  • नीच या अस्त शुक्र: कन्या राशि का नीच शुक्र, सूर्य के निकट अस्त शुक्र या पाप ग्रहों से पीड़ित शुक्र होने पर पति-पत्नी के बीच विवाद और धन की हानि हो सकती है।
  • छठा, आठवाँ या बारहवाँ स्थान: मंगल से या लग्न से इन भावों में शुक्र हो तो अनावश्यक खर्च, कानूनी उलझन या संबंधों में कड़वाहट के योग बनते हैं।
  • मंगल-शुक्र युति: दोनों एक साथ हों तो आकर्षण और इच्छाएँ तीव्र होती हैं; संयम न रहे तो प्रतिष्ठा पर आँच आ सकती है।
  • मारक स्वामित्व: शुक्र दूसरे या सातवें भाव का स्वामी हो तो स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें, खासकर वाहन चलाते समय।

शुक्र और मंगल के उपाय

  • शुक्रवार को "ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः" का जप करें और सफेद वस्त्र या चावल का दान करें।
  • मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करें और "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का जप करें।
  • क्रोध को नियंत्रित करने के लिए नियमित व्यायाम या खेल को दिनचर्या में शामिल करें।
  • जीवनसाथी के साथ स्पष्ट और सम्मानपूर्ण बातचीत बनाए रखें।
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