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अधि योग: चंद्रमा से 6, 7, 8वें भाव में शुभ ग्रह — नियम और फल

अधि योग तब बनता है जब बुध, गुरु और शुक्र चंद्रमा से छठे, सातवें और आठवें भाव में हों। यह नेतृत्व और प्रतिष्ठा से जुड़ा है। नियम, फल और कुंडली में जाँच।

अधि योग का वर्णन बृहत जातक और फलदीपिका जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसे नेतृत्व, अधिकार और प्रतिष्ठा देने वाला योग माना गया है। यह योग चंद्रमा से गिने गए भावों में शुभ ग्रहों की स्थिति से बनता है।

अधि योग कैसे बनता है

जब तीनों शुभ ग्रह — बुध, गुरु और शुक्र — चंद्रमा से छठे, सातवें और आठवें भाव में स्थित हों, तब अधि योग बनता है। ये तीनों ग्रह इन तीन भावों में किसी भी क्रम में बँटे हो सकते हैं, या एक-दो भावों में एक साथ भी हो सकते हैं। कई आचार्य लग्न से गिने गए इन्हीं भावों में शुभ ग्रहों की स्थिति को लग्नाधि योग कहते हैं।

शास्त्रों में बताए गए फल

शास्त्रों के अनुसार अधि योग वाला व्यक्ति मंत्री, सेनापति या किसी बड़े समूह का प्रमुख बनता है। उसे सुख, धन, स्वास्थ्य और दीर्घायु मिलती है, और वह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। आधुनिक संदर्भ में इसे प्रबंधन, प्रशासन या किसी संस्था में नेतृत्व की भूमिका के रूप में समझा जा सकता है।

फल की मात्रा इस पर निर्भर करती है कि कितने शुभ ग्रह इन भावों में हैं। तीनों ग्रह हों तो योग पूर्ण माना जाता है; दो हों तो मध्यम और एक हो तो सामान्य फल मिलते हैं।

योग को बल देने और घटाने वाली बातें

अपनी कुंडली में कैसे जाँचें

अपनी कुंडली में चंद्रमा की राशि से गिनकर छठा, सातवाँ और आठवाँ भाव पहचानें। फिर देखें कि बुध, गुरु और शुक्र में से कितने ग्रह इन तीन भावों में हैं। साथ ही इन ग्रहों का बल और यह भी देखें कि वे पाप ग्रहों से पीड़ित तो नहीं हैं।

पारंपरिक उपाय

योग बनाने वाले शुभ ग्रहों को बल देने के लिए बुधवार को गणेश पूजा, गुरुवार को विष्णु पूजा और शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा पारंपरिक रूप से की जाती है। रत्न धारण करने से पहले पूरी कुंडली की जाँच किसी योग्य ज्योतिषी से कराएँ।

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योग को कुंडली में कैसे सत्यापित करें

हर योग केवल नाम से फल नहीं देता। ग्रह बल, भाव, दृष्टि, दाशा और नीच/उच्च स्थिति से योग का वास्तविक प्रभाव तय होता है।

प्रकाशक: इशवरम। इस पेज पर दी गई सभी तिथियाँ, समय और गणनाएँ इशवरम के गणना इंजन से आती हैं — किसी AI से नहीं। उनका अर्थ समझाने वाली भाषा मशीन की मदद से लिखी गई है, ताकि हर कुंडली की व्याख्या आपकी अपनी भाषा में उसी समय मिल सके; इसे नियमों से जाँचा जाता है, हर पृष्ठ को कोई व्यक्ति अलग से नहीं पढ़ता। हमारी पूरी पद्धति देखें

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