अनफा योग: चंद्रमा से 12वें भाव में ग्रह — नियम, फल और जाँच
अनफा योग तब बनता है जब सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह चंद्रमा से 12वें भाव में हो। बनने का नियम, फल, बल-दुर्बलता और अपनी कुंडली में जाँचने का तरीका।
क्या आपकी कुंडली में अनफा योग बनता है?
अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: गणना इंजन आपकी कुंडली में यह योग जाँचेगा और बताएगा कि कौन से ग्रह, किस राशि और भाव में, इसका कारण हैं। यह योग चंद्रमा की राशि से गिना जाता है और चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलता है, इसलिए जन्म समय ज़रूरी है।
अनफा योग चंद्रमा से बनने वाले तीन प्रमुख योगों — सुनफा, अनफा और दुरुधरा — में से एक है। शास्त्रों में चंद्रमा को मन माना गया है, इसलिए चंद्रमा के दोनों ओर बैठे ग्रह यह बताते हैं कि व्यक्ति का मन किन सहारों पर टिका है।
अनफा योग कैसे बनता है
जब सूर्य को छोड़कर कोई भी ग्रह — मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि — जन्म कुंडली में चंद्रमा से ठीक 12वें भाव में हो, तब अनफा योग बनता है। अधिकांश आचार्य राहु और केतु को भी इस गणना में नहीं लेते। यदि चंद्रमा से दूसरे भाव में भी कोई ग्रह हो, तो योग का नाम बदलकर दुरुधरा हो जाता है; केवल दूसरे भाव में ग्रह होने पर सुनफा योग कहलाता है।
ध्यान दें कि यहाँ गिनती लग्न से नहीं, चंद्र राशि से होती है। उदाहरण के लिए, यदि चंद्रमा कर्क राशि में है तो 12वाँ भाव मिथुन राशि होगा, और मिथुन में बैठा कोई भी पात्र ग्रह अनफा योग बनाएगा।
शास्त्रों में बताए गए फल
फलदीपिका और सारावली जैसे ग्रंथ अनफा योग वाले जातक को सुडौल शरीर, प्रभावशाली व्यक्तित्व, मधुर वाणी और समाज में प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं। ऐसा व्यक्ति सुख-सुविधाओं का आनंद लेता है, पर आयु बढ़ने के साथ उसमें त्याग और वैराग्य की भावना भी दिखाई दे सकती है, क्योंकि 12वाँ भाव व्यय और मोक्ष का भाव है।
फल उस ग्रह के स्वभाव पर निर्भर करता है जो 12वें भाव में बैठा है। गुरु या शुक्र जैसे शुभ ग्रह हों तो उदारता, धार्मिक झुकाव और सुखद जीवन की संभावना बढ़ती है। मंगल या शनि हों तो व्यक्ति परिश्रमी और दृढ़ होता है, पर मन में बेचैनी या खर्चों का दबाव भी रह सकता है।
योग को बल देने और घटाने वाली बातें
- 12वें भाव का ग्रह स्वराशि, उच्च राशि या मित्र राशि में हो तो फल स्पष्ट और शुभ होते हैं।
- चंद्रमा स्वयं बलवान हो — पक्ष बल अच्छा हो और वह पाप ग्रहों से पीड़ित न हो — तो योग अधिक फल देता है।
- 12वें भाव का ग्रह नीच, अस्त या पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो योग के फल कमजोर पड़ जाते हैं।
- उस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा में योग के फल सबसे अधिक अनुभव होते हैं।
अपनी कुंडली में कैसे जाँचें
अपनी जन्म कुंडली में पहले चंद्रमा की राशि देखें, फिर उससे पीछे की ओर एक राशि गिनें — वही चंद्रमा से 12वाँ भाव है। वहाँ सूर्य के अलावा कोई ग्रह है या नहीं, और चंद्रमा से दूसरे भाव में कोई ग्रह है या नहीं — इन दोनों बातों से तय होता है कि योग अनफा है, सुनफा है या दुरुधरा। केवल योग का नाम देखकर निष्कर्ष न निकालें; ग्रह का बल, भाव स्वामित्व और चल रही दशा साथ में देखें।
पारंपरिक उपाय
चंद्रमा को बल देने के लिए सोमवार को शिव पूजा और "ॐ सों सोमाय नमः" मंत्र का जप पारंपरिक रूप से किया जाता है। 12वें भाव में बैठा ग्रह पीड़ित हो तो उसी ग्रह के शास्त्रीय मंत्र का जप और दान किया जाता है। रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली की जाँच अवश्य कराएँ।