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चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा: फल, चुनौतियाँ और उपाय

चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा लगभग डेढ़ साल चलती है। जानिए मन, परिवार, करियर और विदेश यात्रा पर इसके शुभ-अशुभ फल और शास्त्रीय उपाय।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
1 साल 6 महीने
महादशा के कुल वर्ष
10

आपकी चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

चंद्र महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

चंद्र महादशा के 10 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं चंद्र की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। राहु की अंतर्दशा इस क्रम में तीसरी है और 1 साल 6 महीने चलती है। इससे पहले मंगल की और इसके बाद गुरु की अंतर्दशा आती है।

चंद्र महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1चंद्र10 महीने
2मंगल7 महीने
3राहु (यह पृष्ठ)1 साल 6 महीने
4गुरु1 साल 4 महीने
5शनि1 साल 7 महीने
6बुध1 साल 5 महीने
7केतु7 महीने
8शुक्र1 साल 8 महीने
9सूर्य6 महीने

चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

राहु की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो राहु से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (3 महीने) और सबसे छोटी सूर्य की (27 दिन) है।

चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1राहु2 महीने 21 दिन
2गुरु2 महीने 12 दिन
3शनि2 महीने 26 दिन
4बुध2 महीने 17 दिन
5केतु1 महीना 1 दिन
6शुक्र3 महीने
7सूर्य27 दिन
8चंद्र1 महीना 15 दिन
9मंगल1 महीना 1 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा की तिथियाँ 18 दिसंबर 2094 से 18 जून 2096 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

विंशोत्तरी दशा में चंद्रमा की महादशा दस वर्ष की होती है और इसके भीतर राहु की अंतर्दशा लगभग डेढ़ साल चलती है। क्रम में यह मंगल की अंतर्दशा के बाद आती है और इसके बाद गुरु की अंतर्दशा शुरू होती है। चंद्रमा मन, माता, भावनाओं और जनता से जुड़ाव का कारक है, जबकि राहु महत्वाकांक्षा, भ्रम, विदेश, अचानक बदलाव और अपरंपरागत रास्तों का। राहु को चंद्रमा का शत्रु माना जाता है, इसलिए यह अंतर्दशा प्रायः मन में बेचैनी लाती है। फिर भी राहु शुभ भाव में हो तो यही अवधि तेज प्रगति भी दे सकती है। राहु जिस राशि में बैठा होता है, उसके स्वामी की तरह फल देता है, इसलिए राहु की राशि का स्वामी कहाँ है, यह देखना भी जरूरी है। चंद्र महादशा में राहु तीसरी अंतर्दशा है, जो चंद्र और मंगल की अंतर्दशाओं के लगभग एक साल पाँच महीने बाद शुरू होती है।

राहु शुभ हो तो फल: मन, करियर और यात्रा

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि राहु लग्न से केंद्र, त्रिकोण या तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में हो और शुभ ग्रहों की दृष्टि में हो, तो इस अंतर्दशा में कार्य-सिद्धि, धन-लाभ, उच्च पद वाले लोगों से सम्मान और यात्रा से लाभ मिलता है। यदि राहु किसी शुभ भाव के स्वामी के साथ युति में हो, तो वह उस भाव के फल को भी बढ़ाकर देता है। विदेश से जुड़ा काम, तकनीक, आयात-निर्यात और बड़े संस्थानों में अवसर इस समय आगे बढ़ सकते हैं। इस अवधि में मन कई दिशाओं में खिंचता है। एक ओर परिवार और सुरक्षा की इच्छा रहती है, दूसरी ओर कुछ बड़ा और अलग करने की ललक। इसी खिंचाव से नौकरी या शहर बदलने के विचार आते हैं। जिनकी कुंडली में राहु दशम या एकादश भाव में है, उन्हें इस समय पहचान और आय दोनों मिल सकती हैं। अनिद्रा, अधिक सोच-विचार और खान-पान की अनियमितता पर ध्यान दें, क्योंकि चंद्रमा पीड़ित होने पर यही सबसे पहले प्रभावित होते हैं।

राहु पीड़ित हो तो सावधानियाँ

  • आठवाँ या बारहवाँ स्थान: चंद्रमा से इन भावों में राहु हो तो मानसिक तनाव, अनजाना भय, चोरी या धोखे से हानि के योग बनते हैं।
  • चंद्र-राहु युति: जन्म कुंडली में दोनों साथ हों तो इसे ग्रहण योग कहा जाता है; इस अंतर्दशा में उसका असर मन पर अधिक दिखता है।
  • माता और परिवार: माता का स्वास्थ्य और घर का वातावरण ध्यान माँगता है; छोटी बातों पर बड़ी प्रतिक्रिया से बचें।
  • जोखिम भरे फैसले: अफवाह, जल्दी अमीर बनने की योजनाओं और अनजान लोगों पर भरोसे से नुकसान हो सकता है।

राहु और चंद्र के उपाय

  • राहु मंत्र "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः" का नियमित जप करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ या देवी दुर्गा की उपासना करें, जिसे परंपरा में राहु की शांति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
  • सोमवार को चंद्र मंत्र का जप करें और माता का आशीर्वाद लें।
  • काले तिल, कंबल या सरसों के तेल का दान जरूरतमंद लोगों को करें।
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