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चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा: फल, सावधानियाँ और उपाय

चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा लगभग एक साल सात महीने चलती है। जानिए मन, माता, करियर और स्वास्थ्य पर इसके फल और शनि-चंद्र के शास्त्रीय उपाय।

एक नज़र में

अंतर्दशा की अवधि
1 साल 7 महीने
महादशा के कुल वर्ष
10

आपकी चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा कब है?

अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान दर्ज करें: इस अंतर्दशा के शुरू और समाप्त होने की आपकी अपनी तिथियाँ दिखेंगी। दशा की तिथियाँ जन्म के क्षण में चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलती हैं, और चंद्रमा एक दिन में लगभग 13 अंश चलता है, इसलिए इस जाँच के लिए जन्म समय ज़रूरी है।

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दशा चंद्र की स्थिति से बनती है — सही समय ज़रूरी है।

चंद्र महादशा की नौ अंतर्दशाएँ: क्रम और अवधि

चंद्र महादशा के 10 वर्ष नौ अंतर्दशाओं में बँटते हैं: पहली अंतर्दशा स्वयं चंद्र की होती है, फिर विंशोत्तरी क्रम चलता है। शनि की अंतर्दशा इस क्रम में पाँचवीं है और 1 साल 7 महीने चलती है। इससे पहले गुरु की और इसके बाद बुध की अंतर्दशा आती है।

चंद्र महादशा की अंतर्दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमअंतर्दशाअवधि
1चंद्र10 महीने
2मंगल7 महीने
3राहु1 साल 6 महीने
4गुरु1 साल 4 महीने
5शनि (यह पृष्ठ)1 साल 7 महीने
6बुध1 साल 5 महीने
7केतु7 महीने
8शुक्र1 साल 8 महीने
9सूर्य6 महीने

चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ

शनि की यह अंतर्दशा आगे नौ प्रत्यंतर दशाओं में बँटती है, जो शनि से ही शुरू होती हैं। हर प्रत्यंतर की अवधि = अंतर्दशा की अवधि × उस ग्रह के महादशा-वर्ष ÷ 120। यहाँ सबसे लंबी प्रत्यंतर शुक्र की (3 महीने 5 दिन) और सबसे छोटी सूर्य की (29 दिन) है।

चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा की प्रत्यंतर दशाएँ और उनकी अवधि
क्रमप्रत्यंतर दशाअवधि
1शनि3 महीने
2बुध2 महीने 21 दिन
3केतु1 महीना 3 दिन
4शुक्र3 महीने 5 दिन
5सूर्य29 दिन
6चंद्र1 महीना 18 दिन
7मंगल1 महीना 3 दिन
8राहु2 महीने 26 दिन
9गुरु2 महीने 16 दिन

अवधि 360 दिन के दशा-वर्ष से; कैलेंडर तिथियाँ इंजन 365.25 दिन के वर्ष से निकालता है।

उदाहरण: नमूना कुंडली में यह अंतर्दशा

हमारी काल्पनिक नमूना कुंडली (जन्म 1 जनवरी 1990, स्थानीय समय 10:30, नई दिल्ली) के लिए गणना इंजन ने चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा की तिथियाँ 18 अक्टूबर 2097 से 19 मई 2099 निकाली हैं।

ये किसी व्यक्ति की तिथियाँ नहीं हैं; अपनी तिथियाँ ऊपर की जाँच में देखें।

चंद्रमा कोमल, भावुक और परिवर्तनशील मन का कारक है, जबकि शनि अनुशासन, परिश्रम, विलंब और कर्मफल का। शनि चंद्रमा को शत्रु मानता है, इसलिए यह अवधि मन पर बोझ और जिम्मेदारियों का भाव ला सकती है। पर शनि यदि कुंडली में शुभ हो, तो यही समय धैर्य से किए गए काम का स्थायी फल देता है। शनि किन भावों का स्वामी है और चंद्रमा से किस दूरी पर बैठा है, इन्हीं दो बातों से इस अवधि की दिशा तय होती है।

शनि बलवान हो तो फल और साढ़ेसाती से अंतर

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार यदि शनि उच्च राशि तुला में, स्वराशि मकर या कुंभ में, अथवा लग्न से केंद्र-त्रिकोण में शुभ दृष्टि के साथ हो, तो इस अंतर्दशा में भूमि, खेती या अचल संपत्ति से लाभ, संतान से सहयोग और सेवकों या कर्मचारियों से सहायता मिलती है। नौकरी में स्थिरता आती है और लंबे समय से अटके काम धीरे-धीरे पूरे होते हैं। वृषभ और तुला लग्न वालों के लिए शनि योगकारक होता है, इसलिए उन्हें इस अवधि में विशेष रूप से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। बहुत से लोग इस अंतर्दशा को साढ़ेसाती समझ लेते हैं, पर दोनों अलग हैं। साढ़ेसाती गोचर का विषय है, जब शनि चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव से गुजरता है। चंद्र-शनि अंतर्दशा जन्म के समय तय हुई दशा का हिस्सा है। यदि दोनों एक साथ चल रहे हों, तो मन पर दबाव अधिक महसूस होता है और धैर्य, सेवा तथा नियमित दिनचर्या और भी जरूरी हो जाती है। अकेले दोनों में से कोई भी अपने आप में अशुभ नहीं है।

शनि निर्बल हो तो सावधानियाँ

  • नीच या पीड़ित शनि: मेष राशि का नीच शनि या चंद्रमा से छठे, आठवें, बारहवें भाव में शनि होने पर मानसिक उदासी, अकेलापन और कामकाज में देरी बढ़ सकती है।
  • चंद्र-शनि युति: जन्म कुंडली में दोनों साथ हों तो इसे विष योग कहा जाता है; इस अंतर्दशा में उसका असर भावनात्मक थकान के रूप में दिख सकता है।
  • माता का स्वास्थ्य: माता या घर के बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें और नियमित जाँच कराते रहें।
  • स्वास्थ्य: सर्दी-जुकाम, जोड़ों का दर्द और नींद की समस्या पर समय रहते ध्यान दें।

शनि और चंद्र के उपाय

  • शनिवार को "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का जप करें और काले तिल या सरसों के तेल का दान करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, जो चंद्रमा और शनि दोनों की पीड़ा में लाभकारी माना गया है।
  • सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें।
  • बुजुर्गों, श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों की सेवा करें।
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