जब सूर्य आपकी कुंडली में किसी कठिन भाव (2, 4, 7, 8, या 12) में बैठा हो, तो पिता से संबंध, सरकारी कार्यों में देरी, आंखों की समस्या और आत्मविश्वास की कमी के रूप में इसका प्रभाव दिखता है। लाल किताब में सूर्य को 'आत्मा का कारक' माना गया है — जब वह असहज भाव में होता है, तो व्यक्ति की अपनी पहचान और अधिकार पाने की क्षमता प्रभावित होती है।
प्रमुख उपाय: प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें। रविवार को गेहूं, गुड़ और तांबे की वस्तुएं दान करें। गायों या बंदरों को गेहूं और गुड़ खिलाएं। तांबे की अंगूठी या कड़ा दाएं हाथ में पहनें। ध्यान रखें — सूर्य का रत्न माणिक्य (Ruby) तभी पहनें जब कुंडली में सूर्य की स्थिति लाल किताब के अनुसार शुभ हो।
पितृ ऋण: यदि सूर्य भावों 2, 5, 9, या 10 में पीड़ित हो, तो पितृ ऋण की संभावना है — जो करियर में रुकावट, सरकारी देरी और पिता से संबंधों में कर्म-आधारित कठिनाइयों के रूप में प्रकट होता है।
क्या न करें: रविवार को मुफ्त में चीजें न लें। अपनी उम्र या स्थिति के बारे में झूठ न बोलें। पिता या अधिकारियों का अपमान न करें।