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Ishvaram

चंद्र (Chandra) · मुक्ता

मोती (Pearl) — चंद्र (Chandra) रत्न

क्यों मन कभी शांत नहीं होता? क्यों भावनाएं बेकाबू लगती हैं — अत्यधिक संवेदनशील, समझाने योग्य नहीं? क्यों नींद नहीं आती या भयावह स्वप्न परेशान करते हैं? वैदिक ज्योतिष में पीड़ित चंद्र यही मानसिक उथल-पुथल बनाता है। वैदिक उपाय: मोती (मुक्ता), चंद्र का रत्न।

मोती धारण विधि — संक्षिप्त जानकारी

संस्कृत नाम

मुक्ता

ग्रह

चंद्र (Chandra)

धातु

चांदी

वज़न (रत्ती)

5 से 7 रत्ती (4.5–6.3 कैरेट)

दिन

सोमवार — सूर्योदय के एक घंटे के भीतर

उंगली

दाहिने हाथ की कनिष्ठिका (Little finger)

चंद्र (Chandra) बीज मंत्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः (108 बार)

मोती कौन पहने?

मोती तब पहनते हैं जब चंद्र लग्न स्वामी हो (कर्क लग्न), चंद्र नीच हो (वृश्चिक राशि में), या चंद्र महादशा/अंतर्दशा में मानसिक कष्ट हो। मोती सबसे सौम्य रत्नों में से है — अधिकांश कुंडलियों के लिए सुरक्षित।

मोती किसे बलशाली बनाता है

मानसिक शांति, स्मृति, माता संबंध, अंतर्ज्ञान, नींद, भावनात्मक संतुलन

धारण विधि — मोती कैसे पहनें

  1. रविवार की रात मोती की अंगूठी को कच्चे दूध में भिगोएं।
  2. सोमवार को सूर्योदय पर स्नान करें।
  3. अंगूठी को एक घंटे के लिए दूध के कटोरे में रखें।
  4. सफेद कपड़े पर, चंद्र या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  5. 108 बार जपें: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः।
  6. दाहिने हाथ की कनिष्ठिका (छोटी उंगली) में पहनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — मोती

मोती कौन पहन सकता है?

मोती कर्क लग्न के लिए सबसे लाभकारी है। चंद्र महादशा में या जिन लोगों का चंद्र 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो, उनके लिए भी मोती उपयोगी है। मोती सबसे सुरक्षित रत्नों में से है — अधिकांश लोगों के लिए हानिरहित।

कौन सा मोती वैदिक ज्योतिष में मान्य है?

केवल प्राकृतिक, समुद्री, अनुपचारित मोती मान्य हैं। बसरा (फारस की खाड़ी), साउथ सी और ताहिती मोती श्रेष्ठ हैं। मीठे पानी के मोती कम प्रभावशाली हैं। नकली या रेज़िन से भरे मोती में कोई ज्योतिषीय शक्ति नहीं। जेम लैब सर्टिफिकेट से पुष्टि करें: प्राकृतिक, समुद्री, अनुपचारित।

मोती किस धातु में जड़वाएं?

मोती चांदी में जड़वाना चाहिए — चंद्र की धातु। चांदी चंद्र की ऊर्जा को प्रवर्धित करती है। सोने में मोती नहीं जड़वाएं (सूर्य की धातु — चंद्र के विरुद्ध)। रत्न त्वचा को स्पर्श करना चाहिए।

अन्य ग्रह रत्न देखें

स्रोत: बृहत् संहिता (वराहमिहिर, अध्याय 80), गर्ग होरा, होरा सार (पृथुयशस)।

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