भावनात्मक अस्थिरता, चिंता और बार-बार की फिक्र को शांत करता है
स्मरण शक्ति, रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान को बढ़ाता है
माँ से संबंध और घर की सुख-शांति को मजबूत करता है
अनुष्ठान संदर्भ
देवता
चंद्र देवता, शिव (चंद्रशेखर रूप में)
शुभ वार
सोमवार
समय
चंद्रोदय के समय या शाम 7 से रात 10 बजे के बीच, उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुख करके
वस्त्र रंग
मंत्र-साधना के दौरान सोमवार को सफेद या चांदी जैसा रंग
जाप संख्या
108 बार (1 माला)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंद्र मंत्र का जाप किस समय करना सबसे अच्छा है?
शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा का पखवाड़ा) के सोमवार सबसे प्रभावी समय हैं। दिन में सूर्यास्त के बाद शाम या रात का समय बेहतर है, क्योंकि चंद्रमा रात का स्वामी है। पूर्णिमा की रातें प्रभाव को काफी बढ़ा देती हैं।
कुंडली में चंद्रमा को कौन सा रत्न मजबूत करता है?
प्राकृतिक मोती चंद्रमा का शास्त्रीय रत्न है, जिसे सोमवार को दाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली में पहना जाता है। चंद्रकांत मणि (मूनस्टोन) इसका हल्के प्रभाव वाला विकल्प है। पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से हमेशा पुष्टि करें — चंद्रमा का बल और राशि-स्थिति तय करती है कि रत्न लाभ देगा या चंद्र ऊर्जा को अत्यधिक बढ़ा देगा। रत्न वैकल्पिक है; कोई भी रत्न पहनने से पहले ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
वैदिक ज्योतिष में किस स्थिति में चंद्रमा कमजोर होता है?
चंद्रमा वृश्चिक राशि में 3 अंश पर नीच का होता है, जो शास्त्रीय रूप से उसकी सबसे कठिन स्थिति है — इससे भावनाओं में तीव्रता आती है पर उन्हें निकलने का रास्ता नहीं मिलता। दुःस्थान भावों (छठे, आठवें, बारहवें) में चंद्रमा भी चुनौतीपूर्ण है। कृष्ण पक्ष में, खासकर अमावस्या पर हुए जन्म की कुंडली में चंद्रमा पारंपरिक रूप से कमजोर माना जाता है, जिसके लिए मंत्र उपाय जरूरी है।
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मुख्य विषयवास्तु शास्त्रकमरों की दिशा, वास्तु दोष और उपाय देखें