संस्कृत नाम
प्रवाल
मंगल (Mangal) · प्रवाल
क्यों गुस्सा नियंत्रण में नहीं रहता — जब चाहो तब भी? क्यों क्रोध बार-बार जो बना है उसे तोड़ देता है? क्यों संपत्ति विवाद पीछा नहीं छोड़ते? वैदिक ज्योतिष में पीड़ित मंगल यही अनियंत्रित अग्नि बनाता है। वैदिक उपाय: मूंगा (प्रवाल), मंगल का रत्न।
संस्कृत नाम
प्रवाल
ग्रह
मंगल (Mangal)
धातु
सोना या तांबा
वज़न (रत्ती)
6 से 12 रत्ती (5.4–10.8 कैरेट)
दिन
मंगलवार — सूर्योदय के दो घंटे के भीतर
उंगली
दाहिने हाथ की अनामिका (Ring finger)
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (108 बार)
मूंगा तब पहनते हैं जब मंगल लग्न स्वामी हो (मेष या वृश्चिक लग्न), मंगल नीच हो (कर्क में), या मंगल महादशा/अंतर्दशा चल रही हो। मंगल दोष के मामले में ज्योतिषी की सलाह के बाद ही पहनें। मंगल साहस, शारीरिक ऊर्जा, भाई, भूमि-संपत्ति और रक्त का कारक है। सही ढंग से बलवान मंगल आवेगी क्रोध घटाकर ऊर्जा को केंद्रित करता है।
साहस, शारीरिक ऊर्जा, भाई संबंध, भूमि और संपत्ति
मुफ़्त कुंडली विश्लेषण
आपकी कुंडली बार-बार वही जवाब क्यों दिखा रही है?
अंदाज़े से नहीं, अपनी कुंडली से पूछें। समस्या के पीछे का ग्रह और जीवन के लिए सही उपाय देखें।
अपनी कुंडली से पूछें: मेरी कुंडली पढ़कर इस पैटर्न का सच बताइए।
आपकी कुंडली क्या दिखाएगी
बिल्कुल मुफ़्त · बिना लॉगिन
मेष और वृश्चिक लग्न के लिए मूंगा सबसे लाभकारी है — मंगल उनका लग्न स्वामी है। कर्क लग्न के लिए भी उपयुक्त है जहाँ मंगल योगकारक है, और सिंह लग्न के लिए जहाँ मंगल 4थे और 9वें भाव का स्वामी है। मंगल महादशा में विशेष लाभ। मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ लग्न के लिए मूंगा वर्जित है।
मंगल लग्न से चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में होने पर मंगल दोष होता है। बिना जांच के मूंगा पहनने से मंगल की अग्नि और बढ़ सकती है — वैवाहिक विवाद, दुर्घटना या आक्रामकता बढ़ सकती है। ज्योतिषी को कुंडली देखकर बताना होगा कि मंगल दोष हल्का, मध्यम या गंभीर है और क्या रत्न उचित है।
मूंगा सोने (22 कैरेट) या तांबे में जड़वाना चाहिए — दोनों मंगल की धातुएं हैं। सोना अधिक प्रतिष्ठित है और सूर्य से जुड़ाव के कारण मंगल की अग्नि को बढ़ाता है; पुराने ग्रंथों में तांबा पारंपरिक धातु है और मंगल दोष शमन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। चांदी में मूंगा नहीं — चंद्र की धातु मंगल की ऊर्जा को कमज़ोर करती है। रत्न त्वचा को स्पर्श करना चाहिए।
वैदिक ज्योतिष में मंगल रक्त, अस्थि-मज्जा और मांसपेशियों का कारक है। जब कमज़ोर या पीड़ित मंगल का संबंध भाव के आधार पर इन क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याओं से हो, तब मूंगा एक शास्त्रीय उपाय है — शास्त्रों में 'रक्त दोष' के लिए मंगल के रत्न का उल्लेख मिलता है। फिर भी किसी भी स्वास्थ्य प्रयोग के लिए ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण आवश्यक है। रत्न उपाय की एक परत है और चिकित्सा उपचार के साथ चलता है, उसकी जगह नहीं लेता।
वैदिक रत्न शास्त्र गहरे लाल मूंगे (Corallium rubrum) की सलाह देता है — इटैलियन (भूमध्यसागरीय) किस्म शास्त्रीय मानक है, जिसका रंग गहरा रक्त-लाल होता है। जापानी मूंगा (Corallium japonicum) समान रासायनिक संरचना वाला निकट विकल्प है और अधिकांश ज्योतिष परंपराओं में स्वीकार्य है। मुख्य शर्तें: रंग गहरा और एकसार लाल हो (गुलाबी या नारंगी नहीं), टुकड़ा ठोस हो (जोड़कर बनाया हुआ नहीं) और यथासंभव दोषरहित हो। रंगे हुए, ब्लीच किए या पुनर्निर्मित मूंगे से बचें।
स्रोत: बृहत् संहिता अध्याय 80, श्लोक 7 — प्रवाल (मूंगा) मंगल को सौंपा गया।