सूर्य ग्रहण (वलयाकार) (Surya Grahan (Annular Solar Eclipse)) माघ मास में आने वाला एक ग्रहण है। ग्रहण वार्षिक तिथि-पर्व नहीं, एक खगोलीय घटना है: इसकी तारीख और समय सूर्य, चंद्रमा और राहु-केतु की स्थिति से गणना करके निकाले जाते हैं। भारत में इस ग्रहण के लिए कोई व्रत निर्धारित नहीं है।
सूर्य ग्रहण (वलयाकार)
Surya Grahan (Annular Solar Eclipse)
हिंदू मास: माघ
इस ग्रहण के बारे में
वलयाकार सूर्य ग्रहण (अधिकतम 21:30 IST, भारत में सूर्यास्त के बाद)। वलय अर्जेंटीना, दक्षिण अटलांटिक और पश्चिम अफ्रीका (कोत दिवुआर, घाना, टोगो, बेनिन और नाइजीरिया) से दिखेगा; दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के अधिकांश भाग से आंशिक ग्रहण दिखेगा। यह भारत से दिखाई नहीं देगा।
महत्व
सूर्य ग्रहण को परंपरा में नए कार्य शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है। सूतक केवल वहीं लागू होता है जहां ग्रहण दिखाई दे।
पूजा विधि (कैसे मनाएँ)
जहां ग्रहण दिखाई दे, वहां परंपरा में सूतक माना जाता है, सूर्य मंत्र का जप होता है, और ग्रहण समाप्त होने पर स्नान और दान किया जाता है। जहां ग्रहण दिखाई न दे, वहां सूतक नहीं माना जाता।
क्षेत्रीय नाम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य ग्रहण (वलयाकार) कब है?
सूर्य ग्रहण (वलयाकार) शनिवार, 6 फ़रवरी 2027 को है। ग्रहण की तारीख और समय सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से गणना करके निकाले जाते हैं; यह किसी वार्षिक तिथि से तय नहीं होता।
क्या सूर्य ग्रहण (वलयाकार) पर व्रत रखा जाता है?
भारत में इस ग्रहण के लिए कोई व्रत या सूतक निर्धारित नहीं है। ग्रहण का व्रत और सूतक केवल वहीं माने जाते हैं जहां ग्रहण दिखाई दे।
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