मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) (Mokshada Ekadashi (Gita Jayanti)) मार्गशीर्ष मास में आने वाला एक व्रत है। इसकी तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर से नहीं, पंचांग की तिथि से तय होती है, इसलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी तारीख बदलती है और पंचांग से ही निकाली जाती है। इस दिन परंपरा में व्रत रखा जाता है।
मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)
Mokshada Ekadashi (Gita Jayanti)
हिंदू मास: मार्गशीर्ष
पंचांग आधार (तिथि नियम)
हर वर्ष यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। चंद्र तिथि और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अंतर के कारण अंग्रेज़ी तारीख़ हर वर्ष बदलती है।
इस पर्व के बारे में
मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी — इस दिन कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया
महत्व
इसी दिन कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। दार्शनिक दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण एकादशी है, और इसे मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) देने वाली माना जाता है।
पूजा विधि (कैसे मनाएँ)
अन्न से परहेज़ करके व्रत रखें। भगवद् गीता का पाठ करें। कृष्ण की पूजा करें। गीता की पुस्तकें दान करें।
क्षेत्रीय नाम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) कब है?
मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) 2026 में रविवार, 20 दिसंबर 2026 को और 2027 में गुरुवार, 9 दिसंबर 2027 को है। यह तिथि हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार बदलती है, इसलिए अंग्रेज़ी तारीख़ एक वर्ष से दूसरे वर्ष में अलग होती है।
क्या मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) व्रत का दिन है?
हाँ — मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती) व्रत (उपवास) के रूप में रखा जाता है। भक्त उपवास रखते हैं और पूजा विधि पूरी करने के बाद ही व्रत खोलते हैं।
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