उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi) मार्गशीर्ष मास में आने वाला एक व्रत है। इसकी तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर से नहीं, पंचांग की तिथि से तय होती है, इसलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी तारीख बदलती है और पंचांग से ही निकाली जाती है। इस दिन परंपरा में व्रत रखा जाता है। पर्व का स्वरूप और पूजा विधि हर वर्ष वही रहती है।
उत्पन्ना एकादशी
Utpanna Ekadashi
हिंदू मास: मार्गशीर्ष
पंचांग आधार (तिथि नियम)
हर वर्ष यह पर्व मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। चंद्र तिथि और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अंतर के कारण अंग्रेज़ी तारीख़ हर वर्ष बदलती है।
यहाँ मास के नाम पूर्णिमांत पद्धति से हैं, जैसे उत्तर भारत के पंचांगों में, जहाँ मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है। अमांत पंचांगों (महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अधिकांश भाग) में मास अमावस्या पर समाप्त होता है, इसलिए वहाँ यही पक्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष कहलाता है; तारीख वही रहती है।
इस पर्व के बारे में
एकादशी का उद्गम — विष्णु से एकादशी देवी का जन्म
महत्व
यह सबसे पहली मनाई गई एकादशी मानी जाती है। मुर राक्षस का वध करने के लिए विष्णु से एकादशी देवी प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि यह व्रत अन्य सभी एकादशियों का फल देता है।
पूजा विधि (कैसे मनाएँ)
अन्न से परहेज़ करके व्रत रखें। विष्णु की पूजा करें। एकादशी की उत्पत्ति की कथा सुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्पन्ना एकादशी कब है?
उत्पन्ना एकादशी 2026 में शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को और 2027 में बुधवार, 24 नवंबर 2027 को है। यह तिथि हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार बदलती है, इसलिए अंग्रेज़ी तारीख़ एक वर्ष से दूसरे वर्ष में अलग होती है।
क्या उत्पन्ना एकादशी व्रत का दिन है?
हाँ — उत्पन्ना एकादशी व्रत (उपवास) के रूप में रखा जाता है। भक्त उपवास रखते हैं और पूजा विधि पूरी करने के बाद ही व्रत खोलते हैं।
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