बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) वैशाख मास में आने वाला एक पर्व है। इसकी तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर से नहीं, पंचांग की तिथि से तय होती है, इसलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी तारीख बदलती है और पंचांग से ही निकाली जाती है। इस दिन कोई व्रत निर्धारित नहीं है। पर्व का स्वरूप और पूजा विधि हर वर्ष वही रहती है।
बुद्ध पूर्णिमा
Buddha Purnima
हिंदू मास: वैशाख
पंचांग आधार (तिथि नियम)
हर वर्ष यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। चंद्र तिथि और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अंतर के कारण अंग्रेज़ी तारीख़ हर वर्ष बदलती है।
इस पर्व के बारे में
गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का दिन
महत्व
बुद्ध पूर्णिमा को वैसाख या वेसाक भी कहते हैं। यह बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं — जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण — की स्मृति का दिन है। कई पुराणों में बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है।
पूजा विधि (कैसे मनाएँ)
बौद्ध मंदिर या विहार जाएं। ध्यान करें और सजगता का अभ्यास करें। फूल और धूप अर्पित करें। दान करें। अहिंसा और करुणा का पालन करें।
क्षेत्रीय नाम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुद्ध पूर्णिमा कब है?
बुद्ध पूर्णिमा 2026 में शुक्रवार, 1 मई 2026 को और 2027 में गुरुवार, 20 मई 2027 को है। यह तिथि हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार बदलती है, इसलिए अंग्रेज़ी तारीख़ एक वर्ष से दूसरे वर्ष में अलग होती है।
क्या बुद्ध पूर्णिमा व्रत का दिन है?
बुद्ध पूर्णिमा मुख्य रूप से व्रत का दिन नहीं है, फिर भी कई परिवार इस दिन सात्विक आहार या हल्का उपवास रखते हैं।
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