दशहरा (विजयादशमी) 2027: राम की विजय और दुर्गा का पराक्रम
दशहरा 2027 पर रावण दहन और शस्त्र पूजा के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाया जाता है।
दशहरा (विजयादशमी) 2027 भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का उत्सव है। शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 को मनाया जाने वाला यह पर्व नवरात्रि के समापन का प्रतीक है, जब रावण दहन और शस्त्र पूजा की जाती है।
यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ता है। नई दिल्ली में इस दिन नवमी तिथि 09:02 बजे समाप्त होती है और दशमी आरंभ होती है; दशमी रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को 11:41 बजे तक रहती है। नए कार्यों और अनुष्ठानों के लिए अभिजित मुहूर्त 11:45 से 12:31 बजे तक है।
बंगाल में यह पर्व बिजोया दशमी के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में शोभायात्राएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
महत्व और शास्त्रीय आधार
दशहरा (विजयादशमी) हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो धर्म की विजय को दर्शाता है। रामायण के अनुसार भगवान राम ने रावण का वध किया था, और मान्यता है कि देवी दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर का संहार किया था। यह दिन अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक माना जाता है।
पूजा विधि
- अस्त्र-शस्त्र और औज़ारों को तिलक लगाकर शस्त्र पूजा करें।
- अपराजिता फूल का तिलक लगाएं।
- दुर्गा माता को हल्दी-कुमकुम अर्पित करें और 'जय दुर्गे' का जयकार करें।
- दान-पुण्य करें, विशेषकर ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- रामचरितमानस का पाठ करें।
- कई स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता है।
शुभ मुहूर्त
2027 में नई दिल्ली के लिए अभिजित मुहूर्त 11:45 से 12:31 बजे तक है। राहु काल (09:15–10:42) में महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करें। नवमी तिथि पिछले दिन 06:28 बजे आरंभ होकर इस दिन 09:02 बजे समाप्त होती है, जिसके बाद दशमी तिथि आरंभ होती है।
उपाय
- संकल्प: पूजा से पहले स्पष्ट संकल्प करें और परिवार की मंगल कामना रखें।
- दान: अन्न, वस्त्र या दक्षिणा अपनी क्षमता के अनुसार दें।
- मंत्र जप: इष्ट देवता के नाम का शांत मन से जप करें।
व्रत
दशहरे पर उपवास अनिवार्य नहीं है; कई परिवार इस दिन सात्विक भोजन करते हैं।
क्षेत्रीय विविधताएँ
बंगाल में इसे बिजोया दशमी कहते हैं और इस दिन दुर्गा पूजा का समापन होता है। उत्तर भारत में रामलीला के बाद रावण दहन किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में दशहरा (विजयादशमी) कब मनाया जाएगा?
दशहरा 2027 में शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 को मनाया जाएगा। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
दशहरा का क्या महत्व है?
यह त्योहार रामायण में भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय को समर्पित है। यह धर्म की जीत का प्रतीक है।
दशहरा पर क्या रीति-रिवाज होते हैं?
रावण के पुतले जलाना, शस्त्र पूजा (अस्त्र-शस्त्र की पूजा), अपराजिता फूल से तिलक लगाना और नए कार्यों की शुरुआत करना प्रमुख रीतियां हैं।
दशहरा पूजा के लिए कौन-सी चीज़ें चाहिए?
अस्त्र-शस्त्र या औज़ार, अपराजिता फूल, चावल, हल्दी, कुमकुम और पूजा की पारंपरिक वस्तुएं आवश्यक मानी जाती हैं।
क्या दशहरा पर व्रत रखना चाहिए?
नहीं, दशहरा पर विशेष रूप से व्रत का नियम नहीं है। हालाँकि नवरात्रि के दौरान कुछ लोग उपवास करते हैं।
दशहरा का शुभ मुहूर्त कब है?
नई दिल्ली में अभिजित मुहूर्त 11:45 से 12:31 बजे तक है। यह समय नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।
दशहरा और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है?
दशहरा मुख्य रूप से रामायण और रावण पर केंद्रित है, जबकि दुर्गा पूजा देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ी है। दोनों अलग-अलग क्षेत्रों में प्रमुखता से मनाए जाते हैं।
इस पेज पर दी गई सभी तिथियाँ, समय और गणनाएँ इशवरम के गणना इंजन से आती हैं — किसी AI से नहीं। उनका अर्थ समझाने वाली भाषा मशीन की मदद से लिखी गई है, ताकि हर कुंडली की व्याख्या आपकी अपनी भाषा में उसी समय मिल सके। हमारी पूरी पद्धति देखें
अंतिम अद्यतन: