छठ पूजा 2027: तिथि, समय, पूजा विधि और महत्व
सूर्य देव को अर्घ्य देने वाला यह कठोर व्रत बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विशेष महत्व रखता है।
छठ पूजा एक कठोर हिंदू त्योहार है जिसमें भक्त सूर्य देव को नदी/ताल में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अर्घ्य चढ़ाते हैं। यह अपने कठोर व्रत और सूर्यास्त की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।
यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। 2027 में यह 4 नवंबर को गुरुवार को पड़ेगा। मुख्य अनुष्ठान नहाय खाय, खर्णा, और दो अर्घ्य समावेशित हैं।
यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इसमें सूर्य की शक्ति को सम्मान देने और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का दार्शनिक महत्व निहित है।
महत्व और शास्त्रीय आधार
छठ पूजा (2027) सूर्य देव की उपासना करने वाला प्रमुख वैदिक उत्सव है। बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (स्रोत: drikpanchang.com) के अनुसार, यह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन भक्त सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नदी/तालाब में खड़े होकर जल अर्पण (अर्ग्य) करते हैं। यह अनुष्ठान सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।
पूजा विधि
- दिन 1: नाहाय खाय - सुबह स्नान करके खीर भोजन
- दिन 2: खर्णा - 36 घंटे का उपवास, सूर्यास्त पर खीर प्रासाद
- दिन 3: संध्या अर्ग्य - सूर्यास्त के समय जल में तिलक लगाकर प्रार्थना
- दिन 4: उषा अर्ग्य - अगले दिन सूर्योदय पर जल अर्पण
- दिन 4: उपवास समाप्ति - प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन
- पंचमूर्ति पूजन - गंगा, सूर्य, चंद्र, ब्रह्मा, शिव की पूजा
शुभ मुहूर्त
2027-11-04 को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:43 से 12:26 बजे तक रहेगी (स्रोत: calendarlabs.com)। संध्या अर्ग्य सूर्यास्त 17:30 पर और उषा अर्ग्य अगले दिन 06:40 पर होगा। इन समयों को विशेष पवित्र माना जाता है।
उपाय
- पंचतत्व संतुलन: नदी में जल अर्पण से पृथ्वी और जल तत्वों का संतुलन होता है (बृहत्संहिता अनुसार)
- सूर्य मंत्र जाप: सूर्य नमस्कार मंत्र का 108 बार जाप करने से सूर्याशक्ति मिलती है (drikpanchang.com)
- अन्नदान: उपवास के दौरान गरीबों को खीर वितरण करने से पापों का नाश होता है
व्रत
36 घंटे का कठोर उपवास, केवल खीर और फल का सेवन अनुमत। यह परंपरा 'शुद्धता' की अवधारणा को दर्शाती है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
बिहार में इसे 'छठी' और झारखंड में 'सूर्य षष्ठी' कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में 'कुंड' में विशेष पूजा होती है, जबकि नेपाल में 'नारायण पूजा' के साथ मिलाकर मनाया जाता है। सभी क्षेत्रों में अर्ग्य समय स्थानीय सूर्योदय/अस्त के अनुसार बदलता है।
Frequently Asked Questions
छठ पूजा 2027 कब है?
छठ पूजा 2027 में गुरुवार, 4 नवंबर 2027 को है। मुख्य पर्व कार्तिक मास की Shukla Shashthi तिथि को होता है, पर छठ चार दिन का महापर्व है — नहाय-खाय और खरना से शुरू होकर संध्या अर्घ्य और अगली सुबह उषा अर्घ्य पर पूर्ण होता है। अर्घ्य का समय आपके शहर के सूर्यास्त और सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए घाट पर जाने से पहले अपने शहर का सही सूर्य समय पंचांग से देख लें। व्रती छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए तैयारी खरना के दिन से ही पूरी रखें।
छठ पूजा का क्या महत्व है?
यह हिंदू धर्म में सबसे कठिन त्योहारों में से एक है, जहाँ भक्त पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह अस्तमान पर सूर्य की पूजा करने वाला अनोखा त्योहार है जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।
छठ पूजा कैसे मनाई जाती है?
4 दिनों की विशेष रीति: पहला दिन नहाय-खाय (स्नान और भोजन), दूसरा दिन खरना (36 घंटे का व्रत जो खीर से टूटता है), तीसरा दिन संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त पर), चौथा दिन सुबह अर्घ्य (सूर्योदय पर) के साथ उपवास समाप्त।
छठ पूजा के लिए किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है?
Day 1: Nahay Khay (holy bath and meal). Day 2: Kharna (36-hour fast, broken with kheer). Day 3: Sandhya Arghya (evening offerings to setting sun in water). Day 4: Usha Arghya (morning offerings to rising sun). Break fast.
क्या छठ पूजा में उपवास करना अनिवार्य है?
हाँ, यह त्योहार 36 घंटे के कठिन उपवास के साथ मनाया जाता है। खरना दिन पर भक्तों को खीर खाकर ही व्रत टूटता है।
छठ पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या समय है?
4 नवंबर को 11:43 से 12:26 (अभिजित मुहूर्त) शुभ समय माना जाता है। संध्या अर्घ्य सूर्यास्त (17:30) पर और सुबह अर्घ्य सूर्योदय (06:40) पर होगा।
छठ पूजा और अन्य त्योहारों में क्या अंतर है?
छठ पूजा अन्य त्योहारों से अलग है क्योंकि यह अस्तमान पर सूर्य की पूजा करने वाला एकमात्र प्रमुख त्योहार है। इसे 'सूर्य षष्ठी' भी कहा जाता है और यह मुख्य रूप से पूर्वी भारत में मनाया जाता है।
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