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छठ पूजा 2026: सूर्य देव को समर्पित त्योहार की तिथि व महत्त्व

सूर्य देव को जल में अर्घ्य देकर मनाए जाने वाले इस कठिन व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त जानें।

Date2026-11-15रविवार
Tithiशष्ठीशुक्ल पक्ष, कार्तिक मास
Typeपारंपरिक व्रतशुक्ल पक्ष
Deityसूर्य देवउदय और अस्त दोनों

छठ पूजा, जिसे सूर्य शष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक कठिन और पवित्र त्योहार है। इसमें भक्त सूर्य देव को जल में अर्घ्य देते हैं, जो सूर्यास्त के समय किया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है और इसमें 36 घंटे के उपवास और जल में खड़े रहने की प्रथा शामिल है।

छठ पूजा शुक्ल पक्ष की शष्ठी तिथि पर मनाई जाती है, जो 2026 में 15 नवंबर को पड़ती है। यह तिथि चंद्र मास के दूसरे हिस्से में आती है और इसे बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है।

यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है और इसे परिवार के साथ मनाने की परंपरा है। इसमें सूर्य की ऊर्जा को धन्यवाद देने और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने का संदेश निहित है।

महत्व और शास्त्रीय आधार

छठ पूजा का वैदिक महत्व बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में वर्णित सूर्य की आराधना से जुड़ा है। यह पर्व 'प्राणायाम' को समर्पित है, जहाँ भक्त सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जल में अर्घ्य देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह 'तपस्या' और 'प्रकृति के साथ सामंजस्य' को दर्शाता है (बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 2, श्लोक 15)।

पूजा विधि

शुभ मुहूर्त

2026-11-15 को शुभ मुहूर्त 'अभिजित मुहूर्त' (शुभ समय-शुभ समय) और 'सर्वरथा सिद्धि योग' है। राहु काल (शुभ समय-शुभ समय) व अवधि (शुभ समय-शुभ समय) में महत्वपूर्ण कार्य न करें।

उपाय

व्रत

36 घंटे का कठोर उपवास, केवल खीरी और फल की अनुमति।

क्षेत्रीय विविधताएँ

बिहार में 'छठी' के रूप में, झारखंड में 'कर्मा छठ' पर विशेष अनुष्ठान, उत्तर प्रदेश में 'सूर्य शश्ठी' नाम से जानी जाती। नेपाल में इसे 'छी' पर्व के साथ जोड़कर मनाया जाता है।

Frequently Asked Questions

2026 में छठ पूजा कब होगी?

15 नवंबर 2026 (रविवार) को। यह तिथि शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पड़ी है और सूर्य की अस्तमान के समय पूजा की जाती है।

छठ पूजा का क्या महत्व है?

यह हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इसमें सूर्य देव को अर्ग्य देने के लिए नदी में खड़े होकर तपस्या की जाती है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है (स्रोत: drikpanchang.com)

छठ पूजा कैसे मनाई जाती है?

चार दिनों में: 1) नहाय खाय (स्नान व भोजन), 2) खर्णा (36 घंटे का व्रत), 3) सांध्या अर्ग्य (सूर्यास्त पर), 4) उषा अर्ग्य (सूर्योदय पर)।

छठ पूजा के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है?

पवित्र वस्तुएँ: मिट्टी का दीपक, तुलसी, फूल, थाली, साबुत अनाज, और नारियल। विशेष रूप से नदी में अर्ग्य देने के लिए हल्दी-कुमकुम भी प्रयोग होते हैं।

क्या छठ पूजा में व्रत करना ज़रूरी है?

हाँ, यह व्रत 36 घंटे का होता है। खारणा (दूसरा दिन) को खीर खाकर व्रत तोड़ा जाता है। गर्भवती महिलाओं और बीमारों को छूट होती है (बृहत्पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार)

छठ पूजा के लिए शुभ समय क्या है?

सूर्योदय शुभ समय बजे से सूर्यास्त शुभ समय बजे तक। अर्ग्य के लिए 'अभिजित मुहूर्त' शुभ समय-शुभ समय बजे के बीच मानी गई है (स्थानीय समय: IST+शुभ समय)

छठ पूजा और अन्य त्योहारों में क्या अंतर है?

छठ अन्य त्योहारों से अलग है क्योंकि इसमें सूर्य देव को अर्ग्य देते हुए नदी में खड़े होकर तपस्या की जाती है। यह केवल सूर्य पूजा पर केंद्रित है, जबकि होली या दिवाली जैसे त्योहार व्यापक रूप से मनाए जाते हैं।

अंतिम अद्यतन:

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