Ishvaram

दिवाली 2027: दीपावली की तिथि, पूजा समय और महत्वपूर्ण जानकारी

प्रकाश की जीत, समृद्धि का आगमन – दिवाली 2027 के पवित्र अवसरों को जानें

दिनांक2027-10-29शुक्रवार
तिथिअमावस्याकृष्ण पक्ष, कार्तिक मास
प्रकारराष्ट्रीय त्योहारधार्मिक और सांस्कृतिक
देवतालक्ष्मी-गणेशश्रीराम की अयोध्या वापसी

दिवाली (दीपावली) भारत का सबसे बड़ा त्योहार है जो प्रकाश की जीत और भक्ति को समर्पित है। इस दिन भगवान राम की अयोध्या वापसी और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

2027 में दिवाली 29 अक्टूबर (शुक्रवार) को अमावस्या तिथि पर मनाई जाएगी। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है।

यह त्योहार पूरे भारत में घरों में दीयों की रोशनी, लक्ष्मी-गणेश पूजन और पारंपरिक व्यंजनों से मनाया जाता है।

महत्व और शास्त्रीय आधार

दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भगवान राम की 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या की वापसी का प्रतीक है। यह लक्ष्मी-गणेश की पूजा से धन और बुद्धि की प्राप्ति का अवसर है। यह अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का उत्सव है।

पूजा विधि

  • घर की सफाई और रंगोली सजावट
  • कलश और अक्षत के साथ लक्ष्मी-गणेश की स्थापना
  • प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में पूजा
  • दीपों की माला जलाकर घर के आँगन और द्वार पर रखना
  • नए बही-खातों की पूजा (चोपड़ा पूजन)
  • परिवार के सदस्यों को मिठाई बाँटना

शुभ मुहूर्त

2027 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त वृषभ लग्न में 18:35 से 19:59 तक है। दिन में अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:27 तक रहेगा। प्रदोष काल (17:35–19:59) में दीये जलाने की परंपरा है। राहु काल (10:42–12:05) में नए कारोबार शुरू न करें।

उपाय

  • धनलक्ष्मी पूजन: कलश में चावल और सिक्के रखकर सुबह धूप जलाएँ। इसे समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
  • तुलसी पूजन: प्रदोष काल में तुलसी के पास दीया जलाएँ। इसे परिवार में शांति बढ़ाने वाला माना जाता है।

व्रत

दिवाली पर उपवास की कोई निश्चित परंपरा नहीं है।

क्षेत्रीय विविधताएँ

उत्तर भारत में दीये जलाने की परंपरा प्रमुख है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में नरक चतुर्दशी को मुख्य दीपावली के रूप में मनाया जाता है, और बंगाल में दिवाली की अमावस्या की रात काली पूजा होती है। गुजरात में लक्ष्मी पूजन और नए बही-खातों का विशेष महत्व है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में दिवाली (दीपावली) कब है?

दिवाली (दीपावली) शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को मनाई जाएगी। यह कार्तिक अमावस्या के दिन है।

दिवाली (दीपावली) का क्या महत्व है?

यह त्योहार भगवान राम के अयोध्या लौटने और लक्ष्मी पूजन को समर्पित है। यह अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।

दिवाली (दीपावली) कैसे मनाई जाती है?

घर में रंगोली सजाई जाती है, दीये जलाए जाते हैं, लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है, नए कपड़े पहने जाते हैं, और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं।

दिवाली पूजा के लिए कौन-सी चीज़ें चाहिए?

दीये, रंगोली सामग्री, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र, मिठाई और नए बही-खाते।

क्या दिवाली (दीपावली) पर व्रत रखना चाहिए?

नहीं, दिवाली पर उपवास की कोई अनिवार्यता नहीं है। प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन पर ध्यान दिया जाता है।

2027 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त कब है?

18:35 से 19:59 बजे (स्थानीय समयानुसार) के बीच वृषभ लग्न में पूजा करने का सर्वोत्तम समय है।

दिवाली (दीपावली) और अन्य त्योहारों में क्या अंतर है?

धनतेरस बुधवार, 27 अक्टूबर 2027, गोवर्धन पूजा शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 और भाई दूज रविवार, 31 अक्टूबर 2027 को मनाए जाते हैं। प्रत्येक का अलग आध्यात्मिक महत्व है।

इस पेज पर दी गई सभी तिथियाँ, समय और गणनाएँ इशवरम के गणना इंजन से आती हैं — किसी AI से नहीं। उनका अर्थ समझाने वाली भाषा मशीन की मदद से लिखी गई है, ताकि हर कुंडली की व्याख्या आपकी अपनी भाषा में उसी समय मिल सके। हमारी पूरी पद्धति देखें

अंतिम अद्यतन:

Related Vedic timing and chart tools