मकर संक्रांति (Makar Sankranti) एक पर्व है। इसका दिन तिथि से नहीं, सूर्य के नई राशि में प्रवेश (संक्रांति) से तय होता है, इसलिए यह लगभग हर वर्ष एक ही अंग्रेज़ी तारीख के आस-पास आता है। इस दिन कोई व्रत निर्धारित नहीं है। पर्व का स्वरूप और पूजा विधि हर वर्ष वही रहती है।
मकर संक्रांति
Makar Sankranti
हिंदू मास: पौष
पंचांग आधार (तिथि नियम)
यह सौर पर्व है — इसकी तिथि सूर्य के राशि-प्रवेश (संक्रांति) से तय होती है, इसलिए यह लगभग हर वर्ष एक ही ग्रेगोरियन तिथि के आस-पास आता है।
इस पर्व के बारे में
सूर्य के उत्तरायण होने का महापर्व — पवित्र नदी स्नान, तिल-गुड़, खिचड़ी, दान और पतंगबाज़ी के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है।
महत्व
मकर संक्रांति उत्तरायण का आरंभ है — वर्ष का वह शुभ छह माह का भाग, जब सूर्य बलवान होता है और कई परंपराओं में नए कार्य, गृह प्रवेश और विवाह मुहूर्त फिर से शुरू होते हैं। इस दिन संगम में स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने से संचित दोष दूर होने की मान्यता है, और तिल का दान शनि — सूर्य के पुत्र — का शास्त्रीय उपाय है, इसलिए यह दिन दोहरा फलदायी माना जाता है। फ़सल के प्रति कृतज्ञता इस पर्व का दूसरा रूप है: दक्षिण में पोंगल, असम में माघ बिहू और पंजाब में एक शाम पहले लोहड़ी की अग्नि।
पूजा विधि (कैसे मनाएँ)
सूर्योदय से पहले स्नान करें — हो सके तो जल में तिल मिलाएं या नदी घाट पर जाएं। तांबे के पात्र में जल, लाल फूल और तिल लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें और गायत्री या सूर्य मंत्र का जप करें। ज़रूरतमंदों को तिल-गुड़, खिचड़ी की सामग्री, कंबल या गर्म कपड़े दान करें — दान ही इस पर्व का मूल है। परिवार के साथ खिचड़ी और तिल-गुड़ के लड्डू बनाकर बांटें। जहां परंपरा है वहां दोपहर में पतंग उड़ाएं, और सूर्यास्त के समय सूर्य नमस्कार के साथ दिन पूरा करें।
क्षेत्रीय नाम
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति कब है?
मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी 2026 और गुरुवार, 14 जनवरी 2027 को है।
क्या मकर संक्रांति व्रत का दिन है?
नहीं, मकर संक्रांति के लिए कोई व्रत निर्धारित नहीं है।
हाल के और आने वाले वर्षों के दिनांक
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