वास्तु शास्त्र · बच्चों का कक्ष
बच्चों का कक्ष वास्तु — दिशा, दोष और उपाय
बच्चों का कक्ष विकास, रचनात्मकता और विकासशील क्षमता का क्षेत्र है। मानसार इसे पश्चिम (वरुण) या उत्तर-पश्चिम (वायु) में रखता है।
मानसार आदर्श दिशा
पश्चिम (वरुण क्षेत्र)
देवता: वरुण · तत्व: जल तत्व
पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दक्षिण-पश्चिम की भारी पृथ्वी ऊर्जा और उत्तर-पूर्व की आध्यात्मिक सक्रियता से बचते हैं। उत्तर-पश्चिम का वायु तत्व जिज्ञासा, गतिशीलता और सामाजिक सीख का समर्थन करता है। पढ़ाई का कोना कमरे के उत्तर या पूर्व में रखें।
सामान्य बच्चों का कक्ष दोष
दक्षिण-पश्चिम में बच्चों का कक्ष अत्यधिक स्थिरता उत्पन्न करता है — बच्चा सुस्त या परिवर्तन-विरोधी हो जाता है।
बच्चों का कक्ष के लिए शीर्ष 5 वास्तु उपाय
विश्वकर्मा वास्तु शास्त्र परंपरा के शास्त्रीय उपाय — बिना तोड़-फोड़ के।
- 1.
अध्ययन मेज कक्ष के उत्तर या पूर्व कोने में रखें ताकि बच्चा पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पढ़े।
- 2.
उत्तर या पूर्व दीवार पर विश्व मानचित्र या प्रेरणादायक चित्र लगाएं।
- 3.
बच्चे का बिस्तर कक्ष के दक्षिण-पूर्व (अग्नि) क्षेत्र में न रखें।
- 4.
मेज के उत्तर-पूर्व कोने में स्फटिक क्रिस्टल या सरस्वती प्रतिमा रखें।
- 5.
दीवारें हल्के हरे, आकाशी नीले या गर्म पीले रंग से रंगें।
बच्चों का कक्ष वास्तु कैसे लागू करें — चरण दर चरण
चरण 1: कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में
पुष्टि करें कि बच्चों का कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में है।
चरण 2: पढ़ाई की मेज़ पूर्व की ओर
पढ़ते समय बच्चे का मुख पूर्व की ओर रहे।
चरण 3: सोते समय सिर दक्षिण में
पलंग ऐसे रखें कि सिर दक्षिण की ओर रहे।
चरण 4: मेज़ पर स्फटिक या सरस्वती
मेज़ के उत्तर-पूर्वी कोने में स्फटिक या सरस्वती की मूर्ति रखें।
चरण 5: विकास के रंग
दीवारों पर हल्का हरा, आसमानी नीला या गर्म पीला रंग।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बच्चों के कक्ष के लिए कौन सी दिशा सर्वोत्तम है?
पश्चिम (वरुण, विकास और लाभ) आदर्श है। उत्तर-पश्चिम (वायु, गति और सामाजिक शिक्षा) उत्कृष्ट विकल्प है।
अन्य कक्षों के लिए वास्तु
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